युवाओं में राष्ट्रनिर्माण का जोश: रामकृष्ण मिशन छपरा में राष्ट्रीय युवा दिवस पर गूंजे स्वामी विवेकानंद के विचार
छपरा (बिहार) 12 जनवरी 2026
रामकृष्ण मिशन छपरा के तत्वावधान में युग नायक स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर निर्धारित विषय “राष्ट्रवाद और समाजवाद स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में” पर एक प्रेरक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आश्रम के सचिव स्वामी अति देवानंद महाराज ने युवाओं को मानव सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म को बिना किसी को नुकसान पहुँचाए मानवता की सेवा करते रहना ही सच्चा साधना मार्ग है, क्योंकि जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। उनके उद्बोधन ने युवाओं को सेवा, करुणा और राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़ दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जय प्रकाश विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अमरनाथ प्रसाद ने स्वामी विवेकानंद को एक सच्चा समाजवादी बताते हुए कहा कि उन्होंने दीन-हीन और दरिद्र नारायण की सेवा के उद्देश्य से ही रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। उन्होंने विवेकानंद के विचारों को आज के सामाजिक ढांचे के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भारत सरकार के खेल मंत्रालय की जिला युवा अधिकारी निकिता सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा वह शक्ति है जो असंभव को संभव और नामुमकिन को मुमकिन बना देती है। उन्होंने युवाओं से आत्मविश्वास, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया।
इस अवसर पर फेश ऑफ फ्यूचर इंडिया के सक्रिय कार्यकर्ता महेश्वर पंडित और प्रिंस कुमार ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, संघर्ष और उपदेशों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके विचारों को युवाओं के लिए मार्गदर्शक बताया। कार्यक्रम में दिवाकर सिंह, अनुषा मिश्रा, अभिजीत, समृद्धि श्रेया, कर्ण, अरुण दुबे, ऋतुराज, सत्यम, अंश, अवधेश सिंह, रश्मि सहित कई प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट योगदान देने वाले कई युवाओं को सम्मानित भी किया गया। मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बाल्मीकि कुमार द्वारा किया गया। वहीं, रामकृष्ण मिशन छपरा की ग्रामीण शाखाओं सलेमपुर और कोहबरवा में आश्रम के सदस्यों द्वारा रैलियाँ निकालकर स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रनिर्माण और युवा शक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया गया।

