कात्रेनगर आश्रम मानव सेवा का जीवंत तीर्थ, करुणा और पुनर्वास का आदर्श केंद्र : श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव
चांपा / नई दिल्ली (संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी): चांपा: स्वामी विवेकानंद के महान विचार “नर ही नारायण है और नर सेवा ही नारायण सेवा है” को साकार करता हुआ भारतीय कुष्ठ निवारण संघ, कात्रेनगर–चांपा का आश्रम आज मानव सेवा, करुणा और सामाजिक पुनर्वास का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वर्षों से कुष्ठ पीड़ितों एवं समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित यह आश्रम न केवल सेवा का केंद्र है, बल्कि मानवीय गरिमा की पुनर्स्थापना का सशक्त प्रतीक भी है।
इसी क्रम में श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का कात्रेनगर आश्रम में प्रथम आगमन हुआ। आगमन के उपरांत उन्होंने विधिवत श्री सिद्धि विनायक के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं सेवा कार्यों की निरंतरता के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद आश्रम की गतिविधियों और सेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी उन्हें आश्रम से जुड़े श्री सुधीर देव द्वारा दी गई।
श्री सुधीर देव ने बताया कि आश्रम में कुष्ठ पीड़ितों के लिए सुरक्षित आवास, नियमित चिकित्सा सुविधा, सामाजिक एवं मानसिक पुनर्वास, स्वावलंबन हेतु कौशल प्रशिक्षण तथा आजीविका से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। आश्रम का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें।
आश्रम परिसर का भ्रमण करते हुए श्री जूदेव ने वहां निवासरत लाभार्थियों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं से संवाद किया और सेवा कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि कात्रेनगर आश्रम सेवा, संवेदना और समर्पण का सशक्त प्रतीक है, जहां मानव सेवा को ही ईश्वर आराधना का स्वरूप माना जाता है।
इस अवसर पर घनश्याम तिवारी, रवि पांडेय, लक्की पांडेय, श्रीमती अंजू गबेल सहित आश्रम से जुड़े पदाधिकारी, समाजसेवी, स्थानीय नागरिक एवं सेवाकर्मी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में आश्रम के कार्यों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
उल्लेखनीय है कि भारतीय कुष्ठ निवारण संघ, कात्रेनगर–चांपा का यह आश्रम निरंतर सेवा, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के माध्यम से यह संदेश दे रहा है कि मानव सेवा ही सच्ची साधना है, और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।

