रहस्य, इतिहास और आस्था का संगम है लेपाक्षी का वीरभद्र मंदिर
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आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी मंदिर, जिसे श्री वीरभद्र मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय इतिहास, पौराणिक कथाओं और अद्भुत वास्तुकला का अनोखा उदाहरण है। यह मंदिर भगवान शिव के उग्र स्वरूप वीरभद्र को समर्पित है और अपनी रहस्यमयी संरचनाओं के कारण देश–विदेश के श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं को समान रूप से आकर्षित करता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लेपाक्षी का संबंध रामायण काल से जुड़ा है। कहा जाता है कि लंका से लौटते समय रावण से युद्ध में घायल जटायु यहीं आकर गिरे थे। तब भगवान राम ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा था — “ले पक्षी” अर्थात “उठो, हे पक्षी।” इसी वाक्य से इस स्थान का नाम लेपाक्षी प्रचलित हुआ।
ऐतिहासिक दृष्टि से यह मंदिर विजयनगर साम्राज्य की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। 16वीं शताब्दी में, लगभग 1530 ईस्वी के आसपास, अच्युत देवराय के शासनकाल में उनके विश्वस्त अधिकारी वीरुपन्ना और वीरन्ना बंधुओं द्वारा इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया था। मंदिर की भित्तिचित्र कला और शिल्पकला उस युग की उच्च कोटि की कलात्मक परंपरा को दर्शाती है।
लेपाक्षी मंदिर की सबसे चर्चित विशेषता इसका लटकता हुआ स्तंभ है। महामंडप में स्थित यह स्तंभ जमीन को छुए बिना छत को थामे हुए दिखाई देता है, जो आज भी इंजीनियरिंग और विज्ञान के लिए एक रहस्य बना हुआ है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस स्तंभ के नीचे से कपड़ा निकालने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित विशाल नंदी प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह एक ही शिला से तराशी गई नंदी की भव्य मूर्ति मानी जाती है, जिसे विश्व की सबसे बड़ी एकाश्म नंदी प्रतिमाओं में गिना जाता है। इसके अतिरिक्त, मंदिर में एक अधूरा विवाह मंडप भी है, जिसकी दीवारों पर बने लाल धब्बों को लेकर कई लोककथाएँ प्रचलित हैं।
मंदिर परिसर में माता सीता के दिव्य पदचिह्न भी दर्शनीय हैं, जो इसे और अधिक धार्मिक महत्व प्रदान करते हैं। वास्तुकला की दृष्टि से यह मंदिर विजयनगर शैली का उत्कृष्ट नमूना है, जिसमें गर्भगृह, मुख मंडप, अंतराल और प्रदक्षिणा पथ के साथ भव्य स्तंभों और चित्रकारी से सुसज्जित हॉल शामिल हैं।
कुल मिलाकर, लेपाक्षी का वीरभद्र मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और रहस्य का ऐसा संगम है, जो हर आगंतुक को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहराई से परिचित कराता है।
एक बार अगर आप दक्षिण घूमने आए तो यहां वक्त निकाल कर जरूर जाए।

