अनुसूचित जाति–जनजाति अत्याचार निवारण मामलों की सख्त निगरानी, मुआवजा व पुनर्वास पर डीएम सीवान के स्पष्ट निर्देश
सिवान (बिहार): जिला पदाधिकारी सीवान विवेक रंजन मैत्रेय की अध्यक्षता में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 (समय-समय पर संशोधित) के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति तथा मैनुअल स्कैवेंजर रोजगार निषेध एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की प्रगति की समीक्षा करना और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय, मुआवजा एवं पुनर्वास सुनिश्चित करना रहा।
बैठक में महाराजगंज विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक श्री हेमनारायण साह एवं दरौली विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक श्री विष्णुदेव पासवान के साथ पुलिस अधीक्षक सीवान श्री अमर ज्योति, वरीय उप समाहर्ता, जिला कल्याण पदाधिकारी, सिविल सर्जन, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, विशेष लोक अभियोजक (एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम), अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति थाना के थानाध्यक्ष, अधिनियम के नोडल पदाधिकारी सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने तथा आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर होने के बाद पीड़ितों को नियमानुसार देय मुआवजा राशि का भुगतान बिना किसी विलंब के सुनिश्चित किया जाए। इस संबंध में जिला कल्याण पदाधिकारी को विशेष रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई।
जिला पदाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों में आरोप गठन के बाद पीड़ित की मृत्यु हुई है, वहां मृतक के पात्र आश्रितों को नियमानुसार सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए। इस कार्य के लिए जिला कल्याण पदाधिकारी एवं विशेष लोक अभियोजक को समन्वय बनाकर कार्रवाई करने को कहा गया।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि मुआवजा भुगतान से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु जिला कल्याण पदाधिकारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सीवान से समन्वय स्थापित करें, ताकि आरोप पत्र प्राप्त होते ही भुगतान से संबंधित अग्रेतर कार्रवाई शीघ्र पूरी की जा सके।
जिला पदाधिकारी ने विशेष लोक अभियोजक, सीवान को निर्देश दिया कि सुलह के अतिरिक्त जिन मामलों में अभियुक्तों की रिहाई हुई है, वहां नियमानुसार अपील दायर करना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
इसके अतिरिक्त जिला पदाधिकारी ने भारत सरकार के राजपत्र दिनांक 14 अप्रैल 2016 के प्रावधानों का हवाला देते हुए निर्देश दिया कि हत्या से जुड़े सभी मामलों में सामाजिक जांच (सोशल इन्वेस्टिगेशन) कराकर पीड़ित परिवारों को वास भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के अधिकारों की रक्षा, त्वरित न्याय और प्रभावी पुनर्वास प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

