राष्ट्रीय किसान दिवस पर अरावली बचाने का आह्वान, भारतीय हलधर किसान यूनियन की तीखी चेतावनी
नोएडा (उत्तर प्रदेश): राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर भारतीय हलधर किसान यूनियन के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय कोर कमेटी के उपाध्यक्ष तथा बिहार–झारखंड प्रदेश प्रभारी ने नोएडा से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि अरावली को योजनाबद्ध तरीके से तोड़ा गया तो इसका सीधा असर देश की खेती, जल स्रोतों, पर्यावरण और आम नागरिकों के जीवन पर पड़ेगा। इसे विकास का नाम देकर कॉर्पोरेट कब्ज़े की साजिश बताया गया है, जो किसानों, मजदूरों, मध्यम वर्ग और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व के लिए खतरा है।
प्रवक्ता ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला देश की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है, जो वर्षा को रोकने, भूजल को रिचार्ज करने और खेतों को जीवन देने का काम करती है। अरावली के टूटने से कुएं सूख जाएंगे, नलकूप बेकार हो जाएंगे और खेती पूरी तरह कॉर्पोरेट व्यवस्था पर निर्भर हो जाएगी। इसके बाद पानी की समस्या बताकर निजी कंपनियों को समाधान सौंपा जाएगा, जिससे किसानों को महंगे पानी, बढ़े हुए बिजली बिल और खेती छोड़ने की मजबूरी का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने आशंका जताई कि पहाड़ों को तोड़कर जल स्रोत खत्म किए जाएंगे और फिर डैम, पाइपलाइन और समुद्र के पानी को मीठा करने जैसी योजनाओं के नाम पर बड़े ठेके गिने-चुने उद्योगपतियों और विदेशी कंपनियों को दिए जाएंगे। इससे वह पानी, जो प्रकृति ने मुफ्त दिया है, आम लोगों को ईएमआई पर खरीदना पड़ेगा। यह स्थिति देश को प्राकृतिक संसाधनों से वंचित कर कॉर्पोरेट नियंत्रण की ओर ले जाएगी।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि अरावली दिल्ली-एनसीआर की अंतिम सांस है। इसके बिना क्षेत्र गैस चैंबर में तब्दील हो सकता है, जहां हवा जहरीली होगी, मास्क स्थायी हो जाएंगे, बच्चे बीमार होंगे और बुजुर्ग असहाय होंगे। इसके बाद समाधान के नाम पर एयर प्यूरीफायर, प्राइवेट अस्पताल और महंगे स्वास्थ्य बीमा बेचे जाएंगे, यानी पहले बीमारी पैदा की जाएगी और फिर इलाज को कारोबार बनाया जाएगा।
भारतीय हलधर किसान यूनियन ने चेतावनी दी कि खेती के खत्म होने से गांव उजड़ेंगे, शहरों पर बोझ बढ़ेगा, झुग्गियां, बेरोजगारी, अपराध और सामाजिक तनाव बढ़ेगा। असली मुद्दा पहाड़, पानी और जमीन का निजीकरण होगा, जिसे विकास के नाम पर देश की नीलामी बताया गया है। उन्होंने कहा कि जब पहाड़, पानी, हवा और इलाज सब कॉर्पोरेट के हाथ में चले जाएंगे, तो देश लोकतंत्र से निकलकर कंपनी राज की ओर बढ़ जाएगा।
राष्ट्रीय किसान दिवस पर यूनियन ने किसानों और देशवासियों से शांतिपूर्ण, संविधान के भीतर और अहिंसक आंदोलन का आह्वान किया है। गांव-गांव सभाएं करने, सोशल मीडिया पर सवाल उठाने, धरना-प्रदर्शन, पदयात्रा करने और सांसद-विधायकों से जवाब मांगने की अपील की गई है। “अरावली बचाओ” को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लेते हुए कहा गया कि यदि आज आवाज नहीं उठाई गई तो आने वाले समय में न खेती बचेगी, न गांव और न ही देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
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