समाजसेवी मनीष जाट की पहल से पांचवीं बार नर्मदा परिक्रमा, 300 से अधिक श्रद्धालु 15 दिवसीय यात्रा पर रवाना
नरसिंहपुर (मध्यप्रदेश) संवाददाता राजकुमार दुबे: समाज सेवा और धार्मिक आस्था का अनुपम उदाहरण एक बार फिर नरसिंहपुर जिले में देखने को मिला, जब शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी एवं व्यापारी मनीष जाट की पहल पर लगातार पांचवें वर्ष नर्मदा परिक्रमा का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर 300 से अधिक श्रद्धालु चार बसों के माध्यम से 15 दिवसीय नर्मदा परिक्रमा यात्रा पर रवाना हुए। यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था, अनुशासन और सेवा भावना का सशक्त प्रतीक बन चुकी है।
नर्मदा परिक्रमा की विधिवत शुरुआत नरसिंहपुर जिले के प्रसिद्ध बरमान घाट से की गई। सुबह घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और मां नर्मदा के पूजन के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा का आशीर्वाद लेकर परिक्रमा आरंभ की। यह यात्रा लगभग 15 दिनों तक चलेगी, जिसके उपरांत समापन पुनः बरमान क्षेत्र में ही किया जाएगा। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, भोजन, आवास और अनुशासन की जिम्मेदारी मनीष जाट और उनकी टीम द्वारा स्वयं निभाई जा रही है।
नर्मदा परिक्रमा को आत्मशुद्धि, संयम और प्रकृति के सम्मान का प्रतीक माना जाता है। मध्यप्रदेश में हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन पुण्यदायी यात्रा को पूरा करते हैं। मनीष जाट पिछले पांच वर्षों से उन श्रद्धालुओं के लिए सहारा बन रहे हैं, जो आस्था होने के बावजूद संसाधनों के अभाव में यात्रा नहीं कर पाते थे। उनकी ओर से बसों की व्यवस्था, भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे श्रद्धालु निश्चिंत होकर यात्रा कर सकें।
स्थानीय लोगों के अनुसार मनीष जाट मां नर्मदा के अनन्य भक्त हैं और उनका जीवन नर्मदा भक्ति से गहराई से जुड़ा हुआ है। वे प्रतिदिन नर्मदा दर्शन, पूजन और आरती को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। यही कारण है कि उनकी समाज सेवा में धार्मिक आस्था, निष्कलंक भावना और समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। लोगों का विश्वास है कि मां नर्मदा की कृपा से ही वे निरंतर इतने वर्षों से इस सेवा कार्य को सफलतापूर्वक कर पा रहे हैं।
नरसिंहपुर में मनीष जाट की यह पहल अब एक परंपरा का रूप ले चुकी है। हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु इस नर्मदा परिक्रमा का हिस्सा बनते हैं और इसे धार्मिक पर्यटन, सामाजिक सहयोग तथा सामूहिक आस्था का प्रेरणादायक उदाहरण बताते हैं। यह आयोजन न केवल आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी नई दिशा देता है।

