पीयूष वर्ष छंद
बेलगांव, कर्नाटक
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आदमी सुख चैन, से रह ले अगर
बात अपनी शौक, से कह ले अगर
जिन्दगी को गर्व, से जी ले अगर,
प्रीति का रस मौन, हो पी ले अगर।।
नफरतों की तोड़, दे दीवार को,
भूल जाये स्वार्थ, के व्यवहार को।
हादसों के रोंक, दे उपहार को,
आपदा के बाँध, कर अतिचार को।।
मिल परस्पर प्यार, करना सीख ले,
स्नेह का व्यवहार, करना सीख ले।
दीन पर उपकार, करना सीख ले,
नीरसों में रंग, भरना सीख ले।।
विश्व में फिर हो न, अत्याचार तब
शोषणों का दूर, हो अधिकार तब।
स्वर्ग का संसार, उसका तो बने ,
देश में सुख शान्ति, का तम्बू तने।।

