कालाजार के खिलाफ जमीनी जंग, घर-घर जाकर कालाजार रोगियों की होगी पहचान
• आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर करेंगे मरीजों की पहचान
सिवान (बिहार): कालाजार उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिले में घर–घर कालाजार रोगी खोज अभियान को प्रभावी रूप से सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, लकड़ी नवीगंज के अंतर्गत सभी आशा फैसिलिटेटर एवं आशा कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओपी लाल ने की।
प्रशिक्षण सत्र में जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार नीरज कुमार सिंह एवं DNDi संस्थान के समन्वयक राजकिशोर राय ने कालाजार रोग की पहचान, इसके प्रारंभिक एवं गंभीर लक्षण, संदिग्ध रोगियों की खोज, समय पर रेफरल, उपचार प्रक्रिया तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी।
आशा कार्यकर्ता अभियान की मजबूत कड़ी
प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आशा कार्यकर्ता इस अभियान की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनकी सतर्कता, संवेदनशीलता एवं सक्रिय भागीदारी से ही प्रत्येक घर तक पहुंच बनाकर कालाजार रोगियों की समय रहते पहचान संभव हो सकेगी। प्रशिक्षकों ने आशा कार्यकर्ताओं को बताया कि संदिग्ध मरीजों की पहचान होते ही उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में शीघ्र रेफर करना आवश्यक है, ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके।
250 घरों में होगी संभावित मरीजों की खोज
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओपी लाल ने बताया कि अभियान के तहत प्रत्येक आशा कार्यकर्ता को अपने क्षेत्र की लगभग 1000 की आबादी अथवा 200 से 250 घरों में संभावित मरीजों की खोज का दायित्व सौंपा जाएगा। इसके लिए एक माइक्रो प्लान तैयार किया जाएगा, जिसमें कार्यक्षेत्र, लक्षित घरों की संख्या, फॉलोअप की तिथि तथा रिपोर्टिंग प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कालाजार प्रभावित जिलों में वर्ष 2021, 2022, 2023, 2024 एवं नवंबर 2025 तक प्रतिवेदित कालाजार मरीजों के घर से 500 मीटर की परिधि में स्थित 200 से 250 घरों में यह खोज अभियान दिसंबर माह के तीसरे सप्ताह में चलाया जाएगा।
VL, HIV-VL और PKDL पर विशेष नजर
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता घर–घर जाकर कालाजार (VL), HIV-VL एवं PKDL के संभावित रोगियों की पहचान करेंगी। संदिग्ध मरीजों की सूची बनाकर उन्हें तत्काल जांच एवं उपचार के लिए रेफर किया जाएगा। इसका उद्देश्य संक्रमण के किसी भी नए मामले की समय रहते पहचान कर उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि पुनः संक्रमण के खतरे को न्यूनतम किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की सतत पहल
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस तरह का सघन खोज अभियान और आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका राज्य में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक साबित होगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, वीडीसीओ, बीएचएम, बीसीएम, वीबीडीएस तथा पिरामल स्वास्थ्य के पीओ-सीडी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी उपस्थित रहे। स्वास्थ्य अधिकारियों ने आशा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे पूरे समर्पण और जिम्मेदारी के साथ इस अभियान को सफल बनाएं, ताकि जिले को कालाजार मुक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रगति हो सके।

