बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने में कारगर बन रहा सबडर्मल इंप्लांट, बिहार में 11 हजार महिलाओं ने अपनाया
13 जिलों के 27 स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधा, अप्रैल से अगस्त 2026 तक 2,669 महिलाओं ने चुना परिवार नियोजन का यह विकल्प
पटना, 14 अक्टूबर 2026:
बिहार में बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर रखने के लिए सबडर्मल इंप्लांट परिवार नियोजन के एक विकल्प के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2023 में शुरू की गई इस सुविधा के तहत अगस्त 2026 तक राज्य में लगभग 11 हजार महिलाओं को इंप्लांट लगाया जा चुका है। खास बात यह है कि कई महिलाएं निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद दोबारा इस विकल्प को अपना रही हैं।
राज्य के 13 जिलों के 27 स्वास्थ्य संस्थानों में सबडर्मल इंप्लांट लगाने की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए 20 मास्टर ट्रेनर और 288 चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 2,669 महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ लिया। इनमें 22 से 30 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक रही।
रोजाना दवा लेने की जरूरत नहीं
सबडर्मल इंप्लांट माचिस की तीली के आकार का एक छोटा उपकरण होता है, जिसे प्रशिक्षित चिकित्सक महिला की बांह की त्वचा के नीचे लगाते हैं। यह हार्मोन आधारित गर्भनिरोधक विधि है, जो निर्धारित अवधि तक गर्भधारण से बचाव में मदद करती है। इसकी खासियत यह है कि इसे लगवाने के बाद रोजाना गर्भनिरोधक गोली लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इसकी सुविधा और लंबे समय तक प्रभावी रहने की वजह से महिलाएं इसे परिवार नियोजन के विकल्प के रूप में चुन रही हैं। इंप्लांट लगने के बाद भी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सहयोगी संस्थाओं की ओर से नियमित फॉलोअप किया जाता है, ताकि किसी तरह की परेशानी होने पर समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सके।
दोबारा इंप्लांट लगवा रही महिलाएं
पटना के फुलवारी की रहने वाली 24 वर्षीय ममता (काल्पनिक नाम) ने बताया कि पहले वह गर्भनिरोधक गोली और कॉपर-टी का इस्तेमाल करती थीं, लेकिन उन्हें कुछ परेशानियां होती थीं। सबडर्मल इंप्लांट लगवाने के बाद उन्हें यह विकल्प सुविधाजनक लगा। निर्धारित तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने दोबारा इंप्लांट लगवाया।
वहीं, फतुहा-दनियावां की 26 वर्षीय रेखा कुमारी (काल्पनिक नाम) ने बताया कि वह पहली संतान के बाद दूसरा बच्चा तीन साल के अंतराल पर चाहती हैं। उनके अनुसार, सबडर्मल इंप्लांट से परिवार नियोजन की योजना बनाने में सुविधा मिली है। उन्होंने भी इसे दोबारा लगवाने का निर्णय लिया है।
प्रसव और गर्भपात के बाद भी संभव
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, चिकित्सकीय सलाह के आधार पर प्रसव या गर्भपात के बाद भी सबडर्मल इंप्लांट लगाया जा सकता है। इससे महिलाओं को अगले गर्भधारण के बीच पर्याप्त अंतर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।
कुछ गंभीर बीमारियों और स्वास्थ्य स्थितियों में यह विधि उपयुक्त नहीं होती। विशेष रूप से स्तन कैंसर, कुछ प्रकार के हार्मोन-संबंधी रोगों तथा रक्त के थक्के बनने या स्ट्रोक से जुड़ी स्थितियों में चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है। इसलिए इंप्लांट लगवाने से पहले प्रशिक्षित चिकित्सक से परामर्श और स्वास्थ्य जांच कराना आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग की योजना इस सुविधा को राज्य के और अधिक स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की है, ताकि महिलाओं को परिवार नियोजन के विकल्पों की जानकारी और उनकी जरूरत के अनुसार सेवाएं मिल सकें।
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