नहर का बांध टूटा, खेतों में घुसा पानी, किसानों की फसल पर मंडराया संकट
तीन माह पहले बनी साइफन पुलिया के पास रिसाव से मिट्टी का कटाव, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सारण जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत सोनौली गांव में गुरुवार सुबह नहर का बांध टूटने से आसपास के खेतों में पानी फैल गया। लगातार बारिश के बीच नहर में पानी का दबाव बढ़ने के बाद बांध के समीप बनी साइफन पुलिया के पास रिसाव शुरू हुआ। पानी के तेज बहाव से मिट्टी का कटाव हुआ और देखते ही देखते बांध टूट गया।
नहर का पानी खेतों में फैलने से किसानों की तैयार हो रही फसल पर संकट मंडराने लगा है। किसानों को धान समेत अन्य फसलों के नुकसान की चिंता सता रही है।
तीन माह पहले बनी थी साइफन पुलिया
ग्रामीणों के अनुसार किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए नहर के बांध पर करीब तीन माह पहले साइफन पुलिया का निर्माण कराया गया था। निर्माण के कुछ ही समय बाद पुलिया के आसपास से पानी का रिसाव शुरू होने और अब बांध टूटने को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते रिसाव को रोकने और बांध की मरम्मत की जाती तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता था।
रिसाव के बाद मिट्टी का कटाव, टूटा बांध
स्थानीय पंचायत के मुखिया इम्तियाज खान उर्फ चुन्नू बाबू ने बताया कि गुरुवार सुबह पुलिया के आसपास पानी का रिसाव दिखाई दिया। लगातार रिसाव के कारण मिट्टी बहती गई और पानी के दबाव से बांध टूट गया। इसके बाद नहर का पानी तेजी से खेतों की ओर जाने लगा।
मुखिया ने घटना की जानकारी विभागीय अधिकारियों के साथ सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को भी दी। उन्होंने पुलिया के आसपास हुए कटाव की तकनीकी जांच की आवश्यकता बताई।
मौके पर पहुंचे अधिकारी
बांध टूटने की सूचना मिलने के बाद विभाग के कनीय अभियंता मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को करीब एक घंटे के भीतर बांध की मरम्मत शुरू कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद बीडीओ पंकज कुमार और थानाध्यक्ष उज्ज्वल कुमार भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से बांध की तत्काल मरम्मत कराने तथा करीब तीन माह पहले बनी साइफन पुलिया की निर्माण गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेती के इस महत्वपूर्ण समय में यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो फसल को नुकसान हो सकता है। वहीं, निर्माण के कुछ ही महीनों बाद पुलिया के पास मिट्टी का कटाव और बांध टूटने की वास्तविक वजह क्या है, यह प्रशासनिक एवं तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

