किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी, दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक वार्तालाप का समापन
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी, सारण द्वारा आयोजित दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक वार्तालाप का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 4 एवं 5 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल एवं पशु प्रबंधन तथा कृषि क्षेत्र की नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना और उनकी स्थानीय समस्याओं का व्यावहारिक समाधान प्रदान करना था।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. रविन्द्र कुमार तिवारी, डॉ. जितेन्द्र चंदोला, डॉ. सुषमा टम्टा, डॉ. विजय कुमार सहित कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली, समस्तीपुर के डॉ. धीरू कुमार तिवारी, कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर की डॉ. संचिता घोष, कृषि विज्ञान केंद्र लादा, समस्तीपुर के डॉ. आई. जमीर एवं श्री सुमित कुमार सिंह मौजूद रहे।
वैज्ञानिकों ने किसानों को दी उपयोगी जानकारी
कार्यक्रम के प्रथम दिन डॉ. रविन्द्र कुमार तिवारी ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि तथा किसान कल्याणकारी योजनाओं और पशुओं में होने वाली प्रमुख बीमारियों के प्रबंधन की जानकारी दी।
उद्यान विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र चंदोला ने लीची स्टिंक बग के प्रबंधन, वैज्ञानिक तरीके से नए फलोद्यान की स्थापना और प्राकृतिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी किसानों के साथ साझा की।
कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ डॉ. सुषमा टम्टा ने रबी मौसम में उपयोगी कृषि मशीनों, विशेषकर लेजर लैंड लेवलर, जीरो टिलेज मशीन और हैप्पी सीडर के उपयोग एवं उनके लाभों के बारे में बताया। वहीं मृदा विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार ने मिट्टी की जांच के लिए वैज्ञानिक तरीके से मृदा नमूना लेने की विधि और मृदा परीक्षण के महत्व को समझाया।
दूसरे दिन फसल और बागवानी प्रबंधन पर चर्चा
कार्यक्रम के दूसरे दिन कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली, समस्तीपुर के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. धीरू कुमार तिवारी ने फलों की तुड़ाई के बाद बागों में किए जाने वाले आवश्यक प्रबंधन कार्यों की जानकारी दी।
कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर की उद्यान विशेषज्ञ डॉ. संचिता घोष ने गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा जैसे प्रमुख फूलों की उत्पादन तकनीक पर प्रकाश डाला। पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. आई. जमीर ने खरीफ फसलों में होने वाले प्रमुख रोगों और उनके समेकित प्रबंधन की जानकारी दी।
वहीं पादप कीट विशेषज्ञ श्री सुमित कुमार सिंह ने खरीफ मौसम की प्रमुख फसलों में लगने वाले महत्वपूर्ण कीटों की पहचान, उनके प्रभाव और प्रभावी प्रबंधन के बारे में किसानों को विस्तार से बताया।
37 किसानों ने लिया भाग
दोनों दिनों के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं को सुना और उनके वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान सुझाए। कार्यक्रम में सारण जिले के मांझी, रिविलगंज और गरखा प्रखंडों से कुल 37 किसान शामिल हुए।
कार्यक्रम में श्रीमती सुनीता प्रसाद, कन्हैया सिंह, रविन्द्र राम, रंजय कुमार, संजय यादव, अशोक कुमार सिंह, रमेंद्र गिरी, सतीश कुमार सिंह, विमलेश सिंह, श्रीमती सरिता कुमारी, सोनम कुमारी, अंकित कुमार सिंह, राजबली राम सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के श्री अमितेश कुमार गौरव, श्री राकेश कुमार, श्री उमाशंकर कुमार एवं श्री अविनाश पांडेय ने महत्वपूर्ण सहयोग किया।
समापन के अवसर पर किसानों ने वैज्ञानिकों से प्राप्त जानकारी को अपनी खेती में अपनाने और अन्य किसानों तक भी पहुंचाने का संकल्प लिया।

