गतिविधि आधारित शिक्षण से बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर
शिक्षक पिंटू रंजन प्रसाद ने अपनी अनूठी पहल से शिक्षा जगत में पेश की प्रेरक मिसाल
पंचायत शिक्षक से PhD और UGC-NET तक का सफर तय कर बने राज्य स्तर के रोल मॉडल:
मुसहर समुदाय के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर संवार रहे नई पीढ़ी का भविष्य:
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: शिक्षा केवल आजीविका कमाने या नौकरी पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की नींव को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ियों के चरित्र का निर्माण करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इस विचार को धरातल पर उतारते हुए सारण जिले के बनियापुर प्रखंड अंतर्गत धवरी गांव स्थित उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय के सहायक शिक्षक पिंटू रंजन प्रसाद ने ग्रामीण शिक्षा के परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। अपनी नवोन्मेषी सोच, लगन और गतिविधि आधारित शिक्षण के बल पर उन्होंने न केवल विद्यालय के पठन- पाठन के पारंपरिक ढांचे को बदला है, बल्कि अपने विद्यालय को राज्य स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। आगामी शिक्षक दिवस के अवसर पर उनका यह प्रेरक जीवन सफर पूरे शिक्षा जगत और शिक्षक समाज के लिए प्रेरणापुंज बनकर उभरा है।
ग्रामीण शिक्षा की चुनौतियों के बीच नवाचार का उजाला:
ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में शिक्षण कार्य करना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का अभाव, निरंतर बिजली की अनिश्चितता और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी जैसी महत्वपूर्ण समस्याएं डिजिटल शिक्षा के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बनती हैं। इसके अतिरिक्त, तकनीकी संसाधनों का अभाव और ग्रामीण परिवेश में पारंपरिक रटन प्रणाली के प्रति गहराई से जमी रूढ़िवादी सोच भी शिक्षकों के उत्साह को प्रभावित करती है। प्रशासनिक जटिलताएं और नियमित व्यावहारिक प्रशिक्षण का अभाव अक्सर शिक्षकों की पहलकदमी को सीमित कर देता है।
इन तमाम विषमताओं के बावजूद, पिंटू रंजन प्रसाद ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने जटिल और नीरस लगने वाले विषयों को खेल- खेल में और प्रायोगिक तरीकों से पढ़ाना शुरू किया। कक्षाओं को जीवंत बनाने के लिए स्थानीय परिवेश से जुड़े उदाहरणों, दृश्य- श्रव्य सामग्री तथा विभिन्न प्रकार की मनोरंजक गतिविधियों का समावेश किया। इस प्रयोग का सीधा असर बच्चों की उपस्थिति, उनके सीखने के स्तर और वार्षिक परीक्षा परिणामों पर दिखाई देने लगा। अब बच्चे न केवल नियमित रूप से स्कूल आने लगे हैं, बल्कि कठिन से कठिन अवधारणाओं को भी सहजता से समझ रहे हैं।
बिहार विधानसभा में मिला 'टीचर ऑफ द मंथ' का गौरव:
पिंटू रंजन प्रसाद के इन निरंतर नवाचारी प्रयासों को प्रशासनिक और राज्य स्तर पर भी व्यापक सराहना मिली है। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में सबसे प्रमुख मील का पत्थर बिहार विधानसभा परिसर में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में प्रदान किया गया 'टीचर ऑफ द मंथ' का सम्मान है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के हाथों दिया गया था। यह पुरस्कार उनके द्वारा बच्चों के बौद्धिक, व्यावहारिक और मानसिक विकास के लिए किए गए अनूठे प्रयासों की आधिकारिक पुष्टि करता है। इसके अतिरिक्त, उन्हें जिला और राज्य स्तर के विभिन्न मंचों पर कई बार उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है। उनके इन सम्मानों ने ग्रामीण विद्यालयों और वहां कार्यरत शिक्षकों के प्रति जनमानस की धारणा को बदलने का काम किया है।
दो दशकों का साधना पथ, पंचायत शिक्षक से शोधकर्ता तक का अनुकरणीय सफर:
पिंटू रंजन प्रसाद की शैक्षणिक यात्रा निरंतर सीखने और खुद को बेहतर बनाने की अदम्य इच्छाशक्ति का प्रमाण है। उनकी इस दो दशक लंबी यात्रा का संक्षिप्त ब्योरा इस प्रकार है:
प्रारंभिक शुरुआत (2007)-
उन्होंने 09 जनवरी 2007 को कक्षा 1 से 5 के लिए एक साधारण पंचायत शिक्षक के रूप में अपने शिक्षण करियर की शुरुआत की।
उच्च शिक्षा का संकल्प (2010-2020)-
नौकरी के साथ- साथ उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी। वर्ष 2010 में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से स्नातक किया। इसके बाद 2012 में B.Ed, 2014 में इतिहास में M.A., 2016 में शिक्षा (Education) में M.A., 2018 में अंग्रेजी साहित्य में M.A. तथा 2020 में हिंदी साहित्य में M.A. की उपाधि प्राप्त की।
विद्यावारिधि और NET (2023-2024)-
ज्ञान अर्जन की इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने वर्ष 2023 में शिक्षा विषय में Doctorate (Ph.D.) की उपाधि पूर्ण की। इसके पश्चात वर्ष 2024 में उन्होंने शिक्षा शास्त्र से राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित UGC-NET परीक्षा में भी सफलता अर्जित की। उन्होंने CTET, BTET और STET जैसी विभिन्न शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
प्रशासनिक व पदोन्नति यात्रा-
वर्ष 2018 से 2021 तक उन्होंने संकुल संसाधन केंद्र समन्वयक (CRCC) के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इसके बाद 31 मई 2022 को कक्षा 6 से 8 के हिंदी शिक्षक बने। 24 नवंबर 2023 को BPSC की परीक्षा उत्तीर्ण कर कक्षा 9 से 10 के हिंदी शिक्षक के रूप में चयनित हुए। वर्तमान में वे उच्च माध्यमिक विद्यालय, बनियापुर, सारण में उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सामाजिक उत्तरदायित्व- वंचित वर्ग के बच्चों के लिए बने मसीहा:
पिंटू रंजन प्रसाद का योगदान केवल विद्यालय के कमरों और सरकारी कार्य घंटों तक सीमित नहीं है। बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए वह विद्यालय के समीप स्थित मुसहर समुदाय (अत्यंत पिछड़े और वंचित वर्ग) के बच्चों के लिए प्रत्येक रविवार को निःशुल्क विशेष कक्षाओं का संचालन करते हैं। सप्ताह के इस अवकाश के दिन वह इन बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने, उनमें स्वच्छता, नैतिक मूल्यों और प्राथमिक साक्षरता का प्रसार करने का काम करते हैं। उनके इस निःशुल्क प्रयास से इस वंचित समुदाय के दर्जनों बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजाला फैल रहा है।
शिक्षा जगत के लिए एक अमर संदेश:
इस संबंध में पिंटू रंजन प्रसाद कहते हैं कि शिक्षक का कार्य केवल निर्धारित पाठ्यक्रम को पूरा कर देना मात्र नहीं है। एक सच्चा शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करे, उनमें जिज्ञासा पैदा करे और समाज को एक नई दिशा दे। शिक्षा आजीविका पाने का साधन भर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य को गढ़ने की सबसे पवित्र जिम्मेदारी है। पिंटू रंजन प्रसाद की यह अनूठी गाथा यह साबित करती है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज सेवा का सच्चा जज्बा हो, तो संसाधनों की कमी कभी भी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती। उनका यह समर्पण बिहार के हजारों सरकारी शिक्षकों के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

