राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जयंती पर 9 अगस्त को होगी राष्ट्रीय साहित्यिक गोष्ठी, देशभर के साहित्यकार होंगे शामिल
माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत एवं संस्था के तत्वावधान में वर्चुअल आयोजन, प्रतिभागियों को मिलेगा सम्मान पत्र
बरेली (मध्य प्रदेश) | 07 अगस्त 2026
माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत एवं संस्था के तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती के उपलक्ष्य में आगामी 09 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर एक भव्य ऑनलाइन साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कवि, साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी वर्चुअल माध्यम से शामिल होकर राष्ट्रकवि को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे तथा अपने विचार और काव्य-पाठ प्रस्तुत करेंगे।
मंच के संस्थापक पंडित महेश प्रसाद शर्मा (बरेली) एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. रतिराम गढ़ेवाल ‘ज्ञान पिपासु’ (रायपुर, छत्तीसगढ़) ने बताया कि यह आयोजन राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्य, राष्ट्रप्रेम एवं समाज सुधार संबंधी योगदान को समर्पित होगा। उन्होंने सभी साहित्य प्रेमियों एवं मंच के सदस्यों से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने की अपील की है।
गोष्ठी की अध्यक्षता श्रीमती मीरा सक्सेना (दिल्ली) करेंगी। कार्यक्रम में श्री महेंद्र माणिक (पुणे, महाराष्ट्र), श्रीमती उषा अग्रवाल (छतरपुर, मध्य प्रदेश), डॉ. ब्रजेन्द्र नारायण (वाराणसी), श्री भारत भूषण वर्मा (असंध, करनाल, हरियाणा) तथा डॉ. प्रमोद कुमार आदित्य (जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़) विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
आयोजन की मंचीय व्यवस्था का दायित्व महेश प्रसाद शर्मा (बरेली), श्रीमती उर्मिला साईंप्रीत (कटनी, मध्य प्रदेश), डॉ. ज्योतिकृष्ण मिश्रा एवं श्रीमती बबीता यादव (गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश) संभालेंगे।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक योगदान पर चर्चा होगी। वक्ता उनके राष्ट्रवाद, सामाजिक चेतना एवं हिंदी साहित्य को नई दिशा देने वाले लेखन पर अपने विचार रखेंगे। साथ ही मंच से जुड़े साहित्यकार अपनी रचनाओं का पाठ भी करेंगे।
गौरतलब है कि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद स्थित चिरगांव में हुआ था। हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत काव्य रचनाओं के कारण महात्मा गांधी ने उन्हें 'राष्ट्रकवि' की उपाधि प्रदान की थी। उनकी रचनाएं आज भी हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागी साहित्यकारों को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
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