बिहार: निगरानी ब्यूरो का बड़ा ट्रैप: ₹1.26 लाख रिश्वत लेते निजी सहायक और रात्रि प्रहरी गिरफ्तार
बांका, 03 अगस्त 2026
बिहार में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला परिषद कार्यालय, बांका में ₹1.26 लाख रिश्वत लेते हुए दो आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में निजी सहायक ओम प्रकाश मंडल और रात्रि प्रहरी जागेश्वर मंडल शामिल हैं। दोनों को मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद, बांका के कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार किया गया।
सड़क निर्माण के बिल भुगतान के बदले मांगी गई थी रिश्वत
निगरानी ब्यूरो के अनुसार धोरैया थाना क्षेत्र के फतुचक निवासी परिवादी अवध किशोर कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि नाला एवं पीसीसी सड़क निर्माण कार्य के बिल भुगतान के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के सत्यापन में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद निगरानी थाना कांड संख्या-90/26 दर्ज कर विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया।
₹1.26 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारी
सोमवार को निगरानी ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को ₹1,26,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सरकारी योजनाओं में संगठित तरीके से रिश्वत वसूली का नेटवर्क सक्रिय था। इस मामले में कुल पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें सहायक अभियंता सुधीर कुमार, कनीय अभियंता मगरूफ, जिला परिषद चेयरमैन राजेंद्र यादव, निजी सहायक ओम प्रकाश मंडल तथा रात्रि प्रहरी जागेश्वर मंडल शामिल हैं।
सेवानिवृत्त अभियंता के घर से मिले संपत्ति के सुराग
निगरानी ब्यूरो ने बताया कि ओम प्रकाश मंडल वर्ष 2020 में कनीय अभियंता पद से सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन बाद में निजी तकनीकी सहायक के रूप में कार्यालय से जुड़े रहकर कथित दलाली का कार्य कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उनके आवास की तलाशी में बैंक खाते में ₹4 लाख से अधिक की जमा राशि तथा बांका के आजाद चौक स्थित लगभग 2,000 वर्गफुट में निर्माणाधीन दो मंजिला मकान की जानकारी मिली। उनके बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है।
2026 का 90वां भ्रष्टाचार मामला
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2026 में यह भ्रष्टाचार से संबंधित 90वीं प्राथमिकी तथा 83वां ट्रैप केस है। अब तक वर्ष 2026 में 86 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है और ₹31.51 लाख से अधिक की रिश्वत राशि बरामद की गई है। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
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