अब माँ बनने की राह में दर्द नहीं बनेगा बाधा: छपरा सदर अस्पताल में पहली बार हुई पेनलेस नॉर्मल डिलीवरी
एपिड्यूरल तकनीक से दो महिलाओं ने दिया स्वस्थ शिशुओं को जन्म, सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय
छपरा, 3 अगस्त 2026
सारण जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। अब तक निजी अस्पतालों तक सीमित मानी जाने वाली 'पेनलेस नॉर्मल डिलीवरी' (दर्दरहित सामान्य प्रसव) की सुविधा पहली बार छपरा सदर अस्पताल में सफलतापूर्वक शुरू की गई है। आधुनिक एपिड्यूरल एनाल्जीसिया तकनीक की सहायता से दो महिलाओं का सुरक्षित एवं दर्दरहित सामान्य प्रसव कराया गया। इस उपलब्धि के साथ अब आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी सरकारी अस्पताल में अत्याधुनिक प्रसूति सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
सरकारी अस्पताल में पहली बार पेनलेस डिलीवरी
सदर अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा एनेस्थीसिया विभाग के संयुक्त प्रयास से एपिड्यूरल तकनीक का सफल उपयोग किया गया। इस तकनीक के माध्यम से प्रसव के दौरान होने वाले तीव्र दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जाता है, जिससे महिला बिना असहनीय पीड़ा के सामान्य प्रसव कर सकती है।
दो महिलाओं का सफल एवं सुरक्षित प्रसव
इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से खलपुरा (सदर प्रखंड) निवासी साक्षी सिंह तथा मढ़ौरा निवासी ममता कुमारी का सफल सामान्य प्रसव कराया गया। दोनों माताएं एवं उनके नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं। परिजनों ने सरकारी अस्पताल में उपलब्ध इस आधुनिक सुविधा और चिकित्सकों की सराहना की।
कैसे काम करती है एपिड्यूरल तकनीक
एपिड्यूरल एनाल्जीसिया में रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से के एपिड्यूरल स्पेस में एक पतली कैथेटर के माध्यम से दर्द निवारक दवा दी जाती है। इससे प्रसव पीड़ा काफी कम हो जाती है, जबकि प्रसूता पूरी तरह होश में रहती है और सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेती है। आवश्यकता पड़ने पर इसी कैथेटर के जरिए सिजेरियन ऑपरेशन के लिए भी एनेस्थीसिया दिया जा सकता है।
सामान्य प्रसव को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव पीड़ा के डर से कई महिलाएं सिजेरियन ऑपरेशन को प्राथमिकता देती हैं। एपिड्यूरल तकनीक महिलाओं का यह भय दूर करेगी और सुरक्षित सामान्य प्रसव को बढ़ावा देगी। इससे अनावश्यक सिजेरियन ऑपरेशन की संख्या में भी कमी आने की संभावना है।
सरकारी अस्पताल में आधुनिक सुविधा मिलने की नहीं थी उम्मीद
प्रसूता साक्षी सिंह ने कहा कि पहले उन्हें प्रसव के दर्द को लेकर काफी डर था, लेकिन डॉक्टरों ने पूरी प्रक्रिया समझाई और एपिड्यूरल तकनीक से सामान्य प्रसव कराया। उन्होंने कहा कि दर्द पहले की अपेक्षा बहुत कम महसूस हुआ और सरकारी अस्पताल में इतनी आधुनिक सुविधा मिलने की उम्मीद नहीं थी।
वहीं ममता कुमारी ने बताया कि लोगों से प्रसव पीड़ा की बातें सुनकर वह काफी घबराई हुई थीं, लेकिन डॉक्टरों के मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक के कारण उन्हें काफी राहत मिली। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की।
सिविल सर्जन बोले- स्वास्थ्य सेवाओं में नई उपलब्धि
सारण के सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि सदर अस्पताल में पहली बार एपिड्यूरल तकनीक से दर्दरहित सामान्य प्रसव कराना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है। सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी अस्पतालों में भी लोगों को निजी अस्पतालों जैसी आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं को इस सुविधा का लाभ देने का प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मिली नई पहचान
सारण में स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पहले एसएनसीयू (SNCU) के विस्तार और क्लबफुट उपचार जैसी सुविधाएं शुरू की गई थीं। अब पेनलेस नॉर्मल डिलीवरी की शुरुआत ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई पहचान दिलाई है।
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