महिलाओं ने सुनी बहुला और चौथ व्रत की कथा, सनातन परंपरा में बढ़ी पर्वों की रौनक
बहुला और चौथ व्रत त्याग, निष्ठा और समर्पण के प्रतीक: आचार्य राकेश मिश्रा
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सनातन धर्म में महिलाओं एवं युवतियों द्वारा परिवार की सुख-समृद्धि, भाइयों के कल्याण और पति की दीर्घायु की कामना के लिए विभिन्न व्रत एवं उपवास किए जाते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के तहत जिले भर में बहुला व्रत और चौथ व्रत श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया।
बहुला व्रत जहां भाइयों के कल्याण और उनकी लंबी उम्र की कामना से जुड़ा है, वहीं चौथ व्रत पति के सुखी जीवन एवं दीर्घायु के लिए किया जाता है। सनातन संस्कृति में दोनों व्रतों का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।
पंडित अखिलानंद मिश्रा ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संस्थापक सह आचार्य राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि सनातन संस्कृति में व्रत और उपवास केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने और आपसी स्नेह बढ़ाने का माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि बहुला और चौथ व्रत त्याग, निष्ठा और समर्पण के प्रतीक हैं।
धार्मिक स्थलों पर उमड़ी महिलाओं की भीड़
व्रत के अवसर पर छपरा शहर के अलावा जिले के विभिन्न मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और सामुदायिक भवनों में महिलाओं एवं युवतियों की भीड़ देखने को मिली। शाम के समय महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर धार्मिक स्थलों पर पहुंचीं और सामूहिक रूप से बहुला एवं चौथ व्रत की कथा सुनी।
कथावाचकों ने दोनों व्रतों के पौराणिक महत्व, महिमा और विधि-विधान की जानकारी दी। इस दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन भी किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।
धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद व्रतियों ने अपने भाइयों के यशस्वी एवं मंगलमय जीवन तथा पतियों की दीर्घायु की कामना की। इसके बाद चरणामृत और प्रसाद ग्रहण कर महिलाओं ने अपना उपवास पूरा किया।
सामूहिक धार्मिक आयोजनों से जहां सनातन परंपराओं और संस्कृति का संरक्षण होता है, वहीं समाज में भाईचारा, सौहार्द और सांस्कृतिक एकता की भावना भी मजबूत होती है।

