कारगिल विजय दिवस पर मां सरस्वती काव्य मंच भारत ने आयोजित की भव्य आभासी काव्य एवं विचार गोष्ठी
नई दिल्ली: संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी: मां सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत एवं संस्था ‘एक प्रयास भारत’ के संयुक्त तत्वावधान में 26 जुलाई 2026 को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भव्य आभासी काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से जुड़े साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान मंच के संपादक एवं आयोजक पंडित महेश शर्मा ने कारगिल विजय दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में देश के वीर जवानों ने दुर्गम हिमालयी चोटियों पर तिरंगे की आन, बान और शान के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। भारतीय सैनिकों ने अपने अदम्य साहस और पराक्रम से यह साबित किया कि भारत की ओर उठने वाली हर बुरी नजर का जवाब हमारे वीर जवान पूरी ताकत से देने में सक्षम हैं। इसके बाद मां वीणापाणी की स्वर आराधना के साथ सभी अतिथियों और रचनाकारों को शुभकामनाएं प्रेषित की गईं।
मंच के संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री महेंद्र माणिक ने अपनी ओजपूर्ण रचना के साथ कार्यक्रम का शानदार आगाज किया। मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ से उपस्थित डॉ. प्रमोद आदित्य ने तिरंगे के सम्मान में स्वर रचना प्रस्तुत करते हुए कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं दिल्ली की श्रीमती मीरा सक्सेना ने कारगिल युद्ध से जुड़ी अपनी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान उनका बेटा बहुत छोटा था और बड़ों की बातें सुनकर मासूमियत से कहता था—‘मां, मुझे भी बंदूक दिला दो।’
कवि दिनेश कुमार दुबे ने छत्तीसगढ़ी आंचलिक भाषा में अपनी रचना प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। डॉ. उर्मिला साईंप्रीत, कटनी मध्य प्रदेश और डॉ. ज्योति कृष्ण मिश्र, पुणे महाराष्ट्र ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए इसे गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न कराया। उपस्थित सभी रचनाकारों ने अपनी-अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के माध्यम से कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
प्रथम कवयित्री पुष्पलता शर्मा ‘पुष्प’, रतलाम मध्य प्रदेश ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान उनका अपना बेटा भी युद्ध में शामिल था और उनके परिवार के अनेक सदस्य देश सेवा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विरहिणी की व्यथा पर आधारित मार्मिक रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। वहीं भिलाई छत्तीसगढ़ की कवयित्री डॉ. अर्चना पांडेय ‘अक्षिता’ ने अपनी सुंदर प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का भाव जगाते हुए कहा—‘देश की खातिर मरने वाला ही शहीद कहलाता है।’
इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े अनेक साहित्यकारों और रचनाकारों ने सहभागिता की। इनमें श्रीमती पुष्पलता शर्मा ‘पुष्प’ रतलाम, डॉ. ऋचा शर्मा ‘श्रेष्ठा’ करनाल, डॉ. ज्योति कृष्ण मिश्रा पुणे, सरिता श्रीवास्तव जोधपुर, श्री पुहुप राम यदु ‘मोपर’ भाटापारा, डॉ. एस.पी. भारद्वाज रुद्रपुर, श्री राकेश कुमार पंवार बीकानेर, डॉ. अंबे कुमारी बोधगया, डॉ. निराला पाठक रांची, नीरजा सिंह अमरावती, श्री मनीष कुमार शर्मा देवास, डॉ. अर्चना पांडेय ‘अक्षिता’ भिलाई, कु. खुशी कुमारी धनबाद, रेखा अंजू तिवारी कटनी, डॉ. शशिकला अवस्थी इंदौर, श्रीमती सुनीता चौधरी नीमच, श्री दिनेश कुमार दुबे तखतपुर, मीरा सक्सेना ‘माध्वी’ नई दिल्ली, श्री अविनाश खरे पुणे, विजया बाला स्याल पुणे, डॉ. उषा अग्रवाल ‘जलकिरण’ छतरपुर, भारत भूषण वर्मा असंध करनाल, श्री गोविन्द कुमार मिश्र ‘प्रभाकर’ पुणे, डॉ. रुपाली गर्ग नवी मुंबई, कविता नामदेव नजीबाबाद-बिजनौर, सुनंदा बहुगुणे बुरहानपुर, प्रो. शरद नारायण खरे, डॉ. रामदेव शर्मा ‘राही’ मथुरा, डॉ. कृष्णा जोशी इंदौर, उषा टिबड़ेवाल ‘मीरा’ चेन्नई मंच, पंडित मुल्क राज ‘आकाश’ गाजियाबाद तथा डॉ. ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी ‘शैलेश’ सहित अनेक कवि एवं साहित्यकार शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी साहित्यकारों और रचनाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। कारगिल विजय दिवस को समर्पित यह साहित्यिक आयोजन राष्ट्रभक्ति, वीरता और शहीदों के बलिदान की स्मृति को समर्पित रहा। कार्यक्रम में प्रस्तुत ओजपूर्ण, भावपूर्ण और देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं ने आभासी पटल पर मौजूद सभी श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आयोजकों के अनुसार, साहित्य के माध्यम से देश के वीर जवानों के त्याग और बलिदान को जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास बेहद सफल रहा।
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