विश्व संगीत दिवस पर सुरों के माध्यम से एकता, शांति और संस्कृति का उत्सव
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: विश्व संगीत दिवस के अवसर पर शहर में आयोजित संगीत सभा में कलाकारों और संगीत प्रेमियों ने संगीत के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सत्यम कला मंच के निदेशक प्रदीप सौरभ ने कहा कि विश्व संगीत दिवस, जिसे फ्रेंच भाषा में ‘फेटे डी ला म्यूजिक’ कहा जाता है, संगीत को जन-जन तक पहुंचाने और कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और सामाजिक समरसता का सशक्त साधन है। संगीत भाषा, धर्म और सीमाओं की बाधाओं को पार कर लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का कार्य करता है।
संगीत गुरु धनंजय मिश्रा ने बताया कि विश्व संगीत दिवस की शुरुआत वर्ष 1982 में फ्रांस से हुई थी। इसका उद्देश्य संगीत के माध्यम से शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि आज यह दिवस भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी कला संस्कृति मंच एवं सत्यम कला मंच के संयुक्त तत्वावधान में श्रीनंदन पथ स्थित सभागार में संगीत सभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में प्रदीप सौरभ, धनंजय मिश्रा, रुद्र नारायण, आशीष रंजन, श्वेता सिंह, रानी, अनुष्ठा कश्यप, रवि कुमार, अनुज, मुकेश कुमार, किशन कुमार, सुशांत आर्य सहित अनेक कलाकारों ने भाग लिया।
संगीत प्रेमियों ने विश्व संगीत दिवस को संगीत, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द के उत्सव के रूप में मनाते हुए इसकी महत्ता को रेखांकित किया।

