सारण प्रमंडल के 43 थानों की कमान अब इंस्पेक्टरों के हाथ, अपराध नियंत्रण को मिलेगी नई धार
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा अपराध नियंत्रण तंत्र को प्रभावी बनाने की दिशा में पुलिस मुख्यालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य के 217 थानों को अपग्रेड कर पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) श्रेणी में शामिल किया गया है। इस निर्णय के तहत सारण प्रमंडल के 43 थानों को भी नई श्रेणी में स्थान दिया गया है, जहां अब थानाध्यक्ष के रूप में केवल इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार इस पहल का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती कर अपराध नियंत्रण, अनुसंधान की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी को और मजबूत बनाना है। बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने कहा कि यह फैसला राज्य में कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सारण प्रमंडल के अंतर्गत सारण, सिवान और गोपालगंज जिलों के कुल 43 थानों को इंस्पेक्टर श्रेणी में शामिल किया गया है।
सारण जिले के 16 थाने
गरखा, दरियापुर, बनियापुर, मशरक, दिघवारा, मांझी, डोरीगंज, रिविलगंज, एकमा, परसा, अमनौर, पानापुर, तरैया, नगर थाना, भगवान बाजार तथा मुफस्सिल थाना शामिल हैं। हालांकि भगवान बाजार, नगर, मुफस्सिल, मढ़ौरा और सोनपुर थानों में पहले से इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी तैनात हैं।
सिवान जिले के 15 थाने
बड़हरिया, दरौंदा, भगवानपुर हाट, मैरवा, मुफस्सिल, जामो बाजार, गोरियाकोठी, गुठनी, दरौली, लकड़ी नवीगंज, हुसैनगंज, एमएच नगर, नगर थाना, जीबी नगर तथा महाराजगंज थाना को नई श्रेणी में शामिल किया गया है।
गोपालगंज जिले के 12 थाने
कटेया, भोरे, मीरगंज, कुचायकोट, बैकुण्ठपुर, गोपालगंज, उचकागांव, माझागढ़, बरौली, विजयीपुर, गोपालपुर, नगर थाना तथा हथुआ थाना को इंस्पेक्टर कोटि में अपग्रेड किया गया है।
अपराध की स्थिति और संवेदनशीलता बनी आधार
पुलिस मुख्यालय ने बताया कि थानों के चयन में दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या, अपराध की प्रकृति तथा क्षेत्र की संवेदनशीलता को प्रमुख आधार बनाया गया है। जिन थानों में प्रतिवर्ष औसतन 350 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हो रहे हैं, उन्हें इस श्रेणी में शामिल किया गया है।
अधिकारियों का मानना है कि इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों के पास बेहतर प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और अनुसंधान संबंधी दक्षता होती है, जिससे जटिल मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
बिहार में बढ़ी इंस्पेक्टर कोटि के थानों की संख्या
इस निर्णय के बाद बिहार में इंस्पेक्टर कोटि के थानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले राज्य में ऐसे 208 थाने थे, जबकि 217 नए थानों के जुड़ने के बाद यह संख्या बढ़कर 425 हो गई है। इसे बिहार पुलिस व्यवस्था में एक बड़े संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई, लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन तथा आम नागरिकों की शिकायतों के प्रभावी समाधान में सहायता मिलेगी। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता भी मजबूत होगी।
कानून का राज मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
गौरतलब है कि बिहार में वर्तमान में कुल 1382 पुलिस थाने कार्यरत हैं। इनमें महिला थाना, साइबर थाना, रेल थाना तथा अनुसूचित जाति-जनजाति से संबंधित विशेष थानों सहित 238 विशेष श्रेणी के थाने हैं, जबकि 1144 सामान्य श्रेणी के थाने हैं।
पुलिस मुख्यालय के इस फैसले को राज्य में कानून का राज मजबूत करने और अपराधियों के खिलाफ प्रशासनिक पकड़ को और सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि थानों के इस अपग्रेडेशन का जमीनी स्तर पर अपराध नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

