‘Giggles of Balance’ मानवीय रिश्तों, भय और जीवन के संतुलन की कहानियों का संग्रह है: क्षमा राव
राजीव कुमार झा से बातचीत
अंग्रेजी की चर्चित लेखिका क्षमा राव की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। हाल ही में उनका नया कहानी संग्रह ‘Giggles of Balance’ पाठकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस संग्रह में मानवीय रिश्तों, सामाजिक भय, मनोवैज्ञानिक द्वंद्व और मध्यमवर्गीय जीवन के विविध पहलुओं को कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत है उनके नए कहानी संग्रह, साहित्यिक दृष्टि, कविता और अन्य कृतियों पर साहित्यकार एवं पत्रकार राजीव कुमार झा के साथ हुई विशेष बातचीत।
प्रश्न : आप अपनी नई कहानी पुस्तक ‘Giggles of Balance’ के बारे में बताइए?
उत्तर : अक्सर कुछ अनजाने सामाजिक डरों की वजह से हमारे अपनों का व्यवहार और हमारे रिश्तों की डोर बदलने लगती है। मेरी किताब इन्हीं भावनाओं के मनोवैज्ञानिक सफर के बारे में है। यह उन परिस्थितियों को सामने लाती है, जहाँ व्यक्ति अपने भीतर के भय, असुरक्षा और सामाजिक दबावों से जूझता है।
प्रश्न : आदमी के मन में जो भय व्याप्त रहता है, उसे आप अनजाना कैसे कह रही हैं?
उत्तर : मैं इसे अनजाना इसलिए कह रही हूँ क्योंकि यह डर किसी बाहरी दुश्मन का नहीं है। यह वह डर है, जिसे इंसान स्वयं अपने भीतर पालता है—जैसे समाज में अकेले पड़ जाने का डर या दूसरों की अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाने का डर। मेरी किताब इसी मानसिक उलझन को परत-दर-परत खोलती है, जिसे पाठक कहानियों के साथ महसूस कर पाएंगे।
प्रश्न : इस कहानी संग्रह में आपने जिन पात्रों के माध्यम से कथा का ताना-बाना बुना है, उसमें नारी और पुरुष में किसकी प्रधानता है?
उत्तर : अपने आसपास के परिवेश को करीब से देखकर और लोगों के व्यवहार को गहराई से महसूस करके ही मैंने अपनी कहानियों का ताना-बाना बुना है। इस पुस्तक में महिला और पुरुष दोनों पात्रों को समान महत्व दिया गया है। मेरे लिए व्यक्ति का अनुभव और उसका संघर्ष अधिक महत्वपूर्ण है, न कि उसका लिंग।
प्रश्न : क्या इस कहानी संग्रह की सभी कहानियाँ भय के विषय के आसपास केंद्रित हैं या इनमें विभिन्न विषयों का समावेश भी है?
उत्तर : नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सभी कहानियाँ एक ही विषय पर आधारित हैं। इसमें विभिन्न प्रकार के विषयों का समावेश है। किसी कहानी में सामाजिक रूढ़ियों से संघर्ष करता युवा मन दिखाई देगा, तो किसी में जिम्मेदारियों और डरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता पुरुष। वहीं कुछ कहानियों में परंपराओं को चुनौती देती हुई आत्मविश्वासी महिलाएँ भी नज़र आएंगी।
प्रश्न : आपने किस प्रकार के परिवेश में आदमी के जीवन और उसकी जिजीविषा के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को उठाया है? क्या इसमें कस्बाई, शहरी या महानगरीय परिवेश है? पात्र उच्च वर्ग के हैं या मध्यमवर्गीय?
उत्तर : मेरी इन कहानियों का ताना-बाना मुख्य रूप से कस्बाई और मध्यमवर्गीय परिवेश के इर्द-गिर्द बुना गया है। मैंने जानबूझकर मध्यमवर्ग और साधारण तबके के पात्रों को चुना है, क्योंकि यही वह वर्ग है जो परंपराओं, सामाजिक अपेक्षाओं और अपने सपनों के बीच सबसे अधिक संघर्ष करता है। यही संघर्ष मेरी कहानियों की आत्मा है।
प्रश्न : अपनी कुछ कहानियों के उदाहरण से अपनी बात स्पष्ट करें?
उत्तर : बिल्कुल। मेरी एक कहानी नर्मदा घाटी की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें अनिरुद्ध नाम का एक युवा पात्र है। वह जीवन की आपाधापी और हर काम में अंधाधुंध भागने की होड़ में लगा रहता है। उसे लगता है कि यदि वह रुकेगा तो पीछे छूट जाएगा। यही जल्दबाज़ी उसकी सबसे बड़ी मानसिक उलझन बन जाती है।
लेकिन नर्मदा की शांत लहरों और प्राकृतिक वातावरण के बीच वह ठहरने का महत्व सीखता है। उसे एहसास होता है कि जीवन में केवल दौड़ना ही नहीं, बल्कि समय-समय पर रुककर स्वयं को समझना भी आवश्यक है।
प्रश्न : आप हिंदी में भी समाचार पत्रों के लिए लिखती हैं। अपनी कोई कविता और उसके बारे में बताइए।
उत्तर : मेरी कविता ‘ख्वाब और लाचारी’ एक गरीब लड़की के जीवन-संघर्ष को अभिव्यक्त करती है। इसमें उसके छोटे-छोटे सपनों और कठोर यथार्थ के बीच के द्वंद्व को दर्शाया गया है।
कविता में दिखाया गया है कि कैसे आर्थिक अभावों के कारण एक लड़की अपने बचपन की सामान्य इच्छाएँ भी पूरी नहीं कर पाती। चॉकलेट, नए कपड़े और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ उसके लिए सपने बन जाती हैं। कम उम्र में ही उसे जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ता है और कई बार शोषण का सामना भी करना पड़ता है।
यह कविता केवल पीड़ा का चित्रण नहीं करती, बल्कि समाज को संवेदनशील बनने का संदेश भी देती है। कविता का मूल भाव यही है कि यदि हम किसी जरूरतमंद बेटी को सहारा दें, तो उसके जीवन में आशा और सम्मान की नई रोशनी लाई जा सकती है।
प्रश्न : अपनी किसी अन्य पुस्तक के बारे में बताइए।
उत्तर : मेरी एक अन्य पुस्तक ‘Anika and Manav's Galactic Adventures’ बच्चों के लिए लिखी गई एक रोमांचक अंतरिक्ष यात्रा की कहानी है। इस पुस्तक के माध्यम से बच्चों को दोस्ती, सहयोग, साहस और नए अनुभवों से सीखने की प्रेरणा मिलती है। यह मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धक भी है।
प्रश्न : भविष्य की आपकी साहित्यिक योजनाएँ क्या हैं?
उत्तर : मेरा प्रयास रहेगा कि मैं ऐसे विषयों पर लिखती रहूँ जो समाज और व्यक्ति के भीतर चल रहे मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक संघर्षों को सामने लाएँ। साथ ही बच्चों और युवाओं के लिए भी नई रचनाओं पर काम जारी है।
राजीव कुमार झा ने बातचीत के अंत में क्षमा राव को उनके आगामी साहित्यिक प्रयासों और लेखन यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दीं। वहीं क्षमा राव ने पाठकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य समाज और व्यक्ति के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम है।
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