राजगीर स्थित मलमास मेले का महत्व किसी को नहीं पता, लेकिन युवाओं को काजल के डांस का पता
✍️धर्मेंद्र रस्तोगी
राजगीर का मलमास मेला बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक शहर राजगीर में आयोजित होने वाला एक अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध मेला माना जाता है। क्योंकि यह सनातन धर्म में एक विशेष महत्व रखता है और इसे 'देवताओं का मेला' भी कहा जाता है।
इस मेले से जुड़ी मुख्य बातें-
1. मलमास (अधिमास) का महत्व:
हिंदू पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार, चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच के अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे मलमास, अधिमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस पूरे महीने में राजगीर में इस भव्य मेले का आयोजन होता है।
2. पौराणिक मान्यता:
33 करोड़ देवताओं का वास पौराणिक कथाओं के अनुसार, मलमास के दौरान सभी शुभ कार्यों (जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि) पर रोक होती है। माना जाता है कि इस अवधि में भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु द्वारा राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया गया था।
इस यज्ञ में शामिल होने के लिए सनातन धर्म के सभी 33 करोड़ देवी- देवता एक महीने के लिए राजगीर में आकर निवास करते हैं। इसी वजह से इस दौरान राजगीर को छोड़ पूरे ब्रह्मांड में कोई भी धार्मिक या मांगलिक कार्य सफल नहीं माना जाता हैं।
3. गर्म जल के कुंडों (ब्रह्मकुंड) में स्नान:
राजगीर अपने प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों (कुंडों) के लिए प्रसिद्ध है। मेले के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं। ऐसी मान्यता है कि मलमास के दौरान राजगीर के ब्रह्मकुंड और अन्य पवित्र कुंडों में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
4. काग का न आना (एक अनोखा रहस्य)
इस मेले और राजगीर से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प रहस्य यह है कि मलमास के पूरे एक महीने के दौरान राजगीर क्षेत्र में एक भी कौआ (काग) दिखाई नहीं देता। पौराणिक कथा के अनुसार, काकभुशुंडि जी को छोड़कर सभी देवी-देवता यहाँ आते हैं। कहा जाता है कि एक श्राप के कारण इस अवधि में कौए यहाँ प्रवेश नहीं करते।
5. सांस्कृतिक और सामाजिक संगम:
धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा, यह मेला बिहार के सबसे बड़े सांस्कृतिक और व्यापारिक मेलों में से एक है। यहाँ बड़े-बड़े बाजार सजते हैं, हस्तशिल्प (handicrafts) की दुकानें लगती हैं, और लोक कलाओं व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन होता है।
वैसे तो राजगीर का मलमास मेला केवल एक मेला नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, प्रकृति के गर्म जल स्रोतों और पौराणिक कथाओं का एक अनूठा संगम है, जो हर तीन साल में लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। लेकिन बिहार के युवाओं के लिए अब एशिया प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर और मलमास मेला की पहचान बस इतनी रह गई है कि वहाँ आर्केस्ट्रा होता है और खुलेआम अश्लीलता परोसी जाती है, जिस मेले को बिहार की संस्कृति, परंपरा और विरासत की पहचान होना चाहिए था, उसे हम फूहड़ता का मंच बनाते जा रहे हैं।

