जेपी आंदोलन के ऊपज बिजेंद्र प्रसाद यादव 79 साल की उम्र में बने डिप्टी सीएम
✍️ धर्मेंद्र रस्तोगी
पटना, 16 अप्रैल 2026
लगभग तीन दशकों से अधिक के राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक कुशलता के कारण बिहार की राजनीति में अनुभव और वरिष्ठता का एक नया अध्याय तब जुड़ गया जब 79 वर्षीय बिजेंद्र प्रसाद यादव को राज्य का उप मुख्यमंत्री बनाया गया। काफ़ी लंबे राजनीतिक सफर और बेदाग छवि के साथ वह अब नीतीश सरकार के सबसे बुजुर्ग और अनुभवी डिप्टी सीएम बन गए हैं। पहली बार डिप्टी सीएम बनने के बावजूद वह शासन और प्रशासन के हर पहलू से भली- भांति परिचित हैं। बिजेंद्र प्रसाद यादव की नियुक्ति यह भी दर्शाती है कि बिहार की राजनीति में अनुभव और वरिष्ठता को आज भी सम्मान दिया जाता है। उनका लंबा राजनीतिक सफर न केवल युवा नेताओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी साबित करता है कि निरंतर जनसेवा और मजबूत जनाधार के दम पर राजनीति में लंबे समय तक सफलता हासिल की जा सकती है।
जेपी आंदोलन से शुरू हुआ बिजेंद्र प्रसाद यादव का राजनीतिक सफ़र:
सुपौल जिले के सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड के मुरली गांव निवासी बिजेंद्र प्रसाद यादव का राजनीतिक जीवन संघर्ष, निरंतरता और जनसेवा का प्रतीक रहा है। वह सुपौल सदर विधानसभा सीट से लगातार नौ बार विधायक चुने जाने का दुर्लभ रिकॉर्ड रखते हैं। यह उपलब्धि उन्हें बिहार के सबसे मजबूत और अपराजेय नेताओं की श्रेणी में खड़ा करती है।
बिजेंद्र प्रसाद यादव का राजनीतिक सफर जेपी आंदोलन से शुरू हुआ, जिसने देश भर में कई बड़े नेताओं को जन्म दिया। वर्ष 1990 में उन्होंने पहली बार जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस के उम्मीदवार प्रमोद कुमार सिंह को हराकर विधानसभा पहुंचे। उस चुनाव में उन्हें 48 हजार से अधिक वोट मिले थे। इसके बाद 1991 में उन्हें ऊर्जा विभाग में राज्यमंत्री बनाया गया, जो उनके राजनीतिक करियर की पहली बड़ी जिम्मेदारी थी। अपने लंबे कार्यकाल में उन्होंने कई सरकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नीतीश कुमार के काफ़ी करीबी भरोसेमंद:
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सरकार से लेकर नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी के शासनकाल तक उन्होंने कई अहम मंत्रालयों का सफलतापूर्वक संचालन किया है। हालांकि वर्तमान में भी उनके पास ऊर्जा और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है। बिजेंद्र यादव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। जब नीतीश कुमार ने जनता दल से अलग होकर अपनी राजनीतिक राह बनाई, तब बिजेंद्र यादव भी उनके साथ मजबूती से खड़े रहे। शायद यही कारण है कि वह लंबे समय से सत्ता के केंद्र में बने हुए हैं। उनका चुनावी रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली रहा है। 1995 में उन्होंने कांग्रेस के प्रमोद कुमार सिंह को दूसरी बार हराया। 2000 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत की। 2005 में एनडीए सरकार बनने के समय तक जदयू के प्रदेश अध्यक्ष थे और पार्टी को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही।
बिजेंद्र यादव का क्षेत्र में काफ़ी लोकप्रियता और जानदार:
इसके बाद 2010, 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने बड़े अंतर से जीत हासिल की है। खासकर 2015 में महागठबंधन के तहत उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को लगभग 38 हजार वोटों से हराया, जो उनकी सबसे बड़ी जीतों में से एक रही। 2020 में भी उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को 28 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी जीत की परंपरा को कायम रखते हुए कांग्रेस के मिन्नतुल्लाह रहमानी को 30 हजार से अधिक वोटों से हराया। इस चुनाव में उन्हें 1 लाख 9 हजार से ज्यादा वोट मिले, जो उनकी लोकप्रियता और जनाधार को दर्शाता है।

