रामनवमी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: ‘राम से राष्ट्र’ विषय पर विद्वानों ने रखा समकालीन दृष्टिकोण
कोलकाता, 26 मार्च 2026
रामनवमी के पावन अवसर पर शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा ‘राम से राष्ट्र की संकल्पना: समकालीन परिप्रेक्ष्य में एक चिंतन’ विषय पर राष्ट्रीय स्तर की आभासी संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सहित देशभर से विद्वानों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी एवं पत्रकार गायत्री उपाध्याय ने किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीराम के स्मरण के साथ हुआ, जिससे पूरे आयोजन का वातावरण आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक बना रहा।
वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखते हुए राम के चरित्र और रामराज्य की अवधारणा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए विस्तार से चर्चा की। डॉ. निहारिका कुमारी ने राम को आदर्श मानव के रूप में प्रस्तुत करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी प्रेरणा को रेखांकित किया, जबकि अधिवक्ता अंजू मनोत ने रामराज्य और भारतीय संविधान के मूल्यों के बीच सामंजस्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न्याय, समानता और लोककल्याण जैसे तत्व दोनों में समान रूप से विद्यमान हैं।
डॉ. किरण कुमारी ने भारतीय संस्कृति और लोककला में राम की उपस्थिति को रेखांकित किया, वहीं डॉ. अनिता कुमारी ने आधुनिक शासन व्यवस्था में रामराज्य और संविधान के संतुलन को आवश्यक बताया। मुकेश कुमार ने राम के वनवास प्रसंग को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से जोड़ते हुए प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया।
डॉ. शिखा देवगन ने ‘रामराज्य में स्त्री विमर्श’ पर अपने विचार रखे, जबकि अनिता मोदी ने आधुनिक भारत की चुनौतियों के संदर्भ में रामराज्य की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। पारुल तोमर ने वैश्विक शांति में रामराज्य की भूमिका पर चर्चा की और डॉ. सपना चंदेल ने इसकी समकालीन आवश्यकता को रेखांकित किया। इस दौरान मनोज प्रभाकर ढोने ने भारतीय ज्ञान परंपरा में रामराज्य के महत्व पर विचार साझा किए, वहीं किरण कुमारी ने राम विषयक स्वरचित कविता का पाठ कर सभी को भावविभोर कर दिया।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि रामराज्य केवल धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक सामाजिक-राजनीतिक मॉडल है, जो नैतिकता, संस्कृति और सुशासन के आधार पर समकालीन समाज को दिशा देने में सक्षम है।
कार्यक्रम के अंत में प्रिया श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

