विश्व बालिका दिवस पर स्त्री शक्ति संगठन की विचार गोष्ठी, ‘बेटा पढ़ाओ बेटी बचाओ’ के संकल्प के साथ कार्यक्रम संपन्न
नई दिल्ली: संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी: स्त्री शक्ति संगठन द्वारा संगठन संरचना, कार्यप्रणाली, विश्व बालिका दिवस और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ विषयों को केंद्र में रखते हुए एक विचार गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संगठन की मुख्य अध्यक्षा ममता शर्मा के नेतृत्व में हुआ, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों से जुड़ी महिलाओं ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने विचार और अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में भारत मीडिया की एक्जीक्यूटिव हेड एवं समाज सेविका तथा महिला एवं बाल कल्याण विभाग से जुड़ी कोमल खन्ना, वरिष्ठ साहित्यकार प्रतिभा प्रसाद ‘कुमकुम’, मध्य प्रदेश से समाजसेवी नीतू नागर, जम्मू-कश्मीर से अंजु बंसल, एडवोकेट किरण, कंवलजीत कौर, डॉ. जया, मंजूषा दुग्गल, नीलम मिश्रा, तनुजा शुक्ला, आकांक्षा सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहीं। सभी वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण, बालिकाओं की शिक्षा और सामाजिक सोच में बदलाव की आवश्यकता पर विस्तार से अपने विचार रखे।
विचार गोष्ठी के दौरान ज्योति राठौर ने बेटियों की शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित किया, वहीं कोमल खन्ना ने कहा कि बेटियों को केवल बचाना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षित कर निर्णय लेने का अधिकार देना भी समान रूप से आवश्यक है। अंजु बंसल ने समाज में संतुलन के लिए बेटों को भी संस्कारयुक्त शिक्षा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम को साहित्यिक आयाम देते हुए माला झा ने कविता के माध्यम से ‘बेटा पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ का सशक्त संदेश प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने यह स्पष्ट किया कि समस्या बेटियों के जन्म में नहीं, बल्कि समाज की सोच में है। नीतू नागर ने महिलाओं के सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भरता को सामाजिक परिवर्तन की सबसे मजबूत कुंजी बताया, जबकि मंजूषा दुग्गल ने सरकारी योजनाओं, विशेषकर ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के सामाजिक प्रभाव और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अध्यक्षा ममता शर्मा ने जानकारी दी कि स्त्री शक्ति संगठन इस सप्ताह विश्व बालिका दिवस मना रहा है और निकट भविष्य में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाओं पर कार्य करने की रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान में सहभागिता के साथ संगठन एक नए अभियान “बेटा पढ़ाओ बेटी बचाओ” को आगे बढ़ाएगा, जिसका उद्देश्य बेटियों के साथ-साथ बेटों की उचित शिक्षा और संस्कार पर भी समान बल देना है। उन्होंने कहा कि अनुभव बताते हैं कि जहां पुरुष वर्ग संस्कार और शिक्षा से वंचित रहता है, वहां महिलाओं को अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

