योग साधना और शिक्षा के प्रेरणास्रोत वैद्यनाथ सिंह ‘योगी जी मास्टर साहब’ पंचतत्व में विलीन
सारण (बिहार): माँझी प्रखंड के ताजपुर फुलवरिया गांव निवासी प्रख्यात शिक्षक, योग साधक और सामाजिक व्यक्तित्व वैद्यनाथ सिंह उर्फ योगी जी मास्टर साहब शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। लगभग 86 वर्ष की आयु में उन्होंने इस संसार को अलविदा कहा। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और पटना के एक निजी अस्पताल में इलाजरत थे, जहां गुरुवार की शाम करीब 5:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वैद्यनाथ सिंह का जन्म 20 जनवरी 1940 को हुआ था। उन्होंने शिक्षा विभाग में लंबी सेवा देते हुए 1 जनवरी 2001 को सेवानिवृत्ति प्राप्त की। अपने सेवाकाल के दौरान वे मिडिल स्कूल ताजपुर में लंबे समय तक प्रधान शिक्षक के पद पर कार्यरत रहे। शिक्षा के साथ-साथ योग साधना में उनकी विशेष रुचि थी और पतंजलि योग पर उनकी गहरी पकड़ थी। योगाभ्यास में उनकी लचक और साधना ऐसी थी कि लोग कहते थे वे बच्चों की तरह सहज होकर योग कर लेते थे, इसी कारण वे ‘योगी जी’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
योग साधना के क्षेत्र में वे काफी चर्चित रहे और उनका आवास क्षेत्र में ‘राधा कृष्ण योग आश्रम’ के नाम से जाना जाता था। वे छपरा शहर के कई अधिकारियों और गणमान्य लोगों को योग सिखाते थे, जिससे उन्हें प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर विशेष सम्मान प्राप्त था। इसके साथ ही वे भोजपुरी सम्मेलन जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में भी नियमित रूप से सहभागिता करते थे और अपनी भाषा व संस्कृति के संरक्षण में योगदान देते रहे।
अपने पीछे वे एक पुत्र नंदन जी नंदन एवं छह पुत्रियों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। डॉ. विवेकानंद तिवारी, प्राचार्य, डॉ. पी.एन. सिंह डिग्री कॉलेज, छपरा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि योगी जी मास्टर साहब ने उन्हें पुत्रवत स्नेह दिया, उनके जाने से अपूरणीय क्षति हुई है और ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। वहीं शिक्षक बी.के. भारतीय, बीर बहादुर यादव, बाबू आनंद सिंह, मुखिया मनीष सिंह सहित सैकड़ों लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।


