आजादी के 78 साल बाद भी सड़क से वंचित सैदपुर गांव, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए रेलवे लाइन पार करने को मजबूर लोग
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: सारण जिले के माँझी प्रखंड अंतर्गत कौरु धौरु पंचायत के सैदपुर गांव की स्थिति आज भी विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद अल्पसंख्यक समुदाय के लगभग चालीस घरों और करीब तीन सौ की आबादी वाले इस गांव तक आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। सड़क के अभाव में गांव के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं और वोट लेकर चले जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता। अस्सी वर्ष के एक वृद्ध ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कई चुनाव देखे, लेकिन सड़क का सपना आज तक अधूरा ही है।
सैदपुर गांव के युवकों ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई के लिए रेलवे लाइन पार कर स्कूल जाना पड़ता है, जो हमेशा जोखिम भरा रहता है। वहीं महिलाओं को प्रसव के समय खाट पर लादकर रेलवे स्टेशन पार कर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है। कई बार इस दौरान गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन मजबूरी में यही रास्ता अपनाना पड़ता है।
इस संबंध में कौरु धौरु पंचायत की मुखिया वीणा देवी के प्रतिनिधि उदय शंकर सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण की समस्या से बड़े जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं इस मुद्दे को लेकर सारण के जिलाधिकारी महोदय से मिलकर गांव की स्थिति से अवगत कराएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत स्तर पर दो बोरिंग लगवाकर गांव में पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है, लेकिन सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के बिना विकास अधूरा है।
सैदपुर गांव की यह तस्वीर विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। ग्रामीणों को अब भी उम्मीद है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनकी पीड़ा को समझेंगे और जल्द सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।

