अयोध्या से जनकपुर तक पदयात्रा पर निकले वैष्णव संतों का मांझी रामघाट पर भव्य स्वागत
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से चलकर माता सीता की जन्मभूमि जनकपुर के मार्ग से चार धाम एवं 12 ज्योतिर्लिंग की पदयात्रा पर निकले वैष्णव संप्रदाय से जुड़े लगभग ढाई दर्जन साधु-संतों का जत्था शनिवार की संध्या मांझी के ऐतिहासिक रामघाट पहुंचा। संतों के आगमन पर पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बन गया और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।
रामघाट पर स्थित स्थानीय हनुमान गढ़ी मंदिर के पुजारी संत रामप्रिय दास जी महाराज ने सभी आगंतुक साधु-संतों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य स्वागत किया। संतों से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि चार धाम एवं 12 ज्योतिर्लिंग की यात्रा को उन्होंने अपनी तपस्या का मानक बनाया है और पदयात्रा के माध्यम से समाज में धर्म के प्रति आस्था और रुचि जागृत करने का संकल्प लिया है।
साधु-संतों ने बताया कि यह पदयात्रा केवल धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि आम लोगों को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास है। उनका कहना था कि यह यात्रा लगभग पांच वर्षों तक निरंतर चलेगी, जिसमें वे देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों को धर्म, संयम और सेवा के मार्ग पर प्रेरित करेंगे।
रविवार को संत रामप्रिय दास जी महाराज के नेतृत्व में हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में साधु-संतों के सम्मान में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे के उपरांत सभी साधु-संतों को सम्मानपूर्वक आगे की यात्रा के लिए विदा किया गया।
इस अवसर पर पूर्व जिला पार्षद धर्मेन्द्र सिंह समाज, बीडीसी प्रतिनिधि सुनील कुमार पाण्डेय, मुकेश सिंह, कुशजी सिंह, सुरेन्द्र यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।

