जननायक कर्पूरी ठाकुर जयंती पर मांझी में उमड़ा जनसैलाब, विचार गोष्ठी के बाद कंबल वितरण
मांझी में जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती धूमधाम से मनाई गई, विचार संगोष्ठी के साथ जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी नगर पंचायत अंतर्गत हरदेव यादव कन्या उच्च विद्यालय परिसर में शनिवार को कर्पूरी विचार मंच के तत्वावधान में जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत जननायक कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करने के साथ हुई। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक नागेन्द्र ठाकुर द्वारा उपस्थित अतिथियों और आगंतुकों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे आयोजन का वातावरण गरिमामय बन गया।
सभा को संबोधित करते हुए नाई समाज के अध्यक्ष प्रभुनाथ ठाकुर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर सामाजिक समता के प्रबल योद्धा थे। उन्होंने बिहार में व्याप्त विषमता, सामंतवाद, पूंजीवाद और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया, इसी कारण जनता ने उन्हें ‘जननायक’ की उपाधि दी। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर गरीबों, शोषितों और वंचितों के सच्चे रहनुमा थे और उनका पूरा जीवन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को समर्पित रहा।
वहीं ई. सौरभ सन्नी ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन और संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने गरीबों, पिछड़ों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनका सादगीपूर्ण और सिद्धांतनिष्ठ जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि कर्पूरी ठाकुर का जीवन और विचार सामाजिक न्याय की दिशा में मार्गदर्शक हैं।
कार्यक्रम को मुख्य पार्षद विजया देवी, कार्यपालक पदाधिकारी रक्षा लोहिया, स्वच्छता पदाधिकारी सुमन कुमारी, शिक्षक व कवि बिजेंद्र कुमार तिवारी, कृष्णा सिंह पहलवान, राजेंद्र प्रसाद ठाकुर, झुंझुनू ठाकुर, आनंदी ठाकुर, राजेश ठाकुर, डॉ. पंकज ठाकुर, सत्येंद्र ठाकुर, राहुल ठाकुर, मोहम्मद असलम और उमाशंकर ओझा सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच सुखाड़ी ठाकुर ने की, जबकि उद्घाटन मनोज प्रसाद ने किया। मंच संचालन रंजन शर्मा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के समापन के पश्चात सामाजिक सरोकार को आगे बढ़ाते हुए सैकड़ों जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल का वितरण किया गया, जिससे जननायक कर्पूरी ठाकुर के सेवा और जनकल्याण के विचारों को व्यवहारिक रूप दिया गया।

