माँझी-दरौली मार्ग पर खतरे का पुल: दाहा नदी पर ताजपुर में जर्जर पुल बना मौत का न्योता, प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: माँझी–दरौली मुख्य मार्ग पर ताजपुर बाजार के समीप दाहा नदी पर वर्ष 2011 में निर्मित पुल इन दिनों गंभीर खतरे का कारण बना हुआ है। पुल की संरचना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, बावजूद इसके अवैध रूप से भारी वाहनों का आवागमन लगातार जारी है। जिला प्रशासन द्वारा पहले भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन बालू और गिट्टी लदे सैकड़ों वाहन धड़ल्ले से इस पुल को पार कर रहे हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुल के बीम में कई स्थानों पर गहरी दरारें आ चुकी हैं। पुल की रेलिंग और फुटपाथ भी पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जो इसकी कमजोर हालत को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई जा सकी है, जिससे पुल की स्थिति दिन-प्रतिदिन और खराब होती जा रही है।
स्थिति को और भी खतरनाक बना रही है पुल पर होने वाली अवैध गतिविधियां। शाम के समय पुल के दोनों ओर मांस और मछली की दुकानें सज जाती हैं, वहीं सुबह और शाम लोगों की भारी भीड़ यहां जुटती है। इसके साथ ही पुल पर वाहनों की अवैध पार्किंग भी आम बात हो गई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और जान-माल की भारी क्षति की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि माँझी–दरौली मार्ग के अलावा ताजपुर–एकमा का वैकल्पिक सड़क मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद भारी वाहनों को जानबूझकर इसी जर्जर पुल से गुजारा जा रहा है। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि आम लोगों की जान को भी खतरे में डाल रहा है।
इस संबंध में जदयू के जिला सचिव सुनील कुमार सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जिला प्रशासन द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग को कुछ बालू माफियाओं ने रात के अंधेरे में जेसीबी की मदद से तोड़कर हटा दिया। इसके बाद से फिर से बड़े वाहनों का आवागमन शुरू हो गया, जिससे पुल पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आगामी 21 जनवरी को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सारण जिले के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे मुख्यमंत्री से मिलकर पुल निगम के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। उनकी मांग है कि दाहा नदी पुल पर तत्काल सख्त बैरिकेडिंग लगाकर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद की जाए और पुल निर्माण एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि किसी संभावित हादसे से पहले ठोस कदम उठाए जा सकें।

