भारत–श्रीलंका हिंदी मैत्री का भव्य उत्सव: द्वितीय भारत–श्रीलंका हिंदी सम्मेलन का ऐतिहासिक आयोजन
✍️ धर्मेंद्र रस्तोगी
कोलंबो (श्रीलंका): 12 जनवरी 2026 को स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय उच्चायोग, कोलंबो में भारत–श्रीलंका के बीच भाषा, साहित्य और संस्कृति की मैत्री को सशक्त करने वाला द्वितीय भारत–श्रीलंका हिंदी सम्मेलन भव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन भारत के माननीय उच्चायुक्त श्री संतोष झा तथा श्रीलंका की शिक्षा एवं उच्च शिक्षा की उप मंत्री डॉ. मधुर सेनेविरत्न ने संयुक्त रूप से किया। यह आयोजन दोनों देशों के बीच हिंदी के माध्यम से सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग का जीवंत प्रतीक बना।
कार्यक्रम संचालिका अथिला कोथवाला ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत और श्रीलंका से आए 400 से अधिक हिंदी विद्वान, शिक्षक एवं विद्यार्थी सहभागी बने। सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत–श्रीलंका संबंधों को जोड़ने वाली एक सशक्त सांस्कृतिक सेतु है।
इस अवसर पर श्रीलंका के उन वरिष्ठ हिंदी विद्वानों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने दशकों से श्रीलंका में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर योगदान दिया है। कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण हिंदी प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया गया, जिनमें ‘श्रीलंका हिंदी समाचार’, रबिन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा संपादित ‘श्रीलंका की चयनित रचनाएँ’ तथा ‘विश्व रंग – श्रीलंका’ विषयक विशेष पत्रिकाएँ प्रमुख रहीं।
विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र और उपहार प्रदान किए गए। साथ ही केंद्रीय हिंदी संस्थान की परीक्षाओं में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र एवं पुस्तकें भेंट की गईं। एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में ‘विश्व रंग 2025’ के अंतर्गत पहली बार श्रीलंका ने प्रत्यक्ष रूप से हिंदी ओलंपियाड में भाग लिया और तृतीय स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए विजेता को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मेलन के अंतर्गत तीन महत्वपूर्ण शैक्षणिक सत्र—श्रीलंका में हिंदी, कविता सत्र और मुक्त सत्र—आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रीलंकाई हिंदी विद्वानों ने सहभागिता की। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत भारतीय नृत्य एवं संगीत प्रस्तुतियों के साथ-साथ श्रीलंका के हिंदी गीत एवं फिल्म प्रेमियों के संघ द्वारा पुराने हिंदी गीतों की मनोहारी प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
इस सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के लिए स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय उच्चायोग, कोलंबो के निदेशक प्रो. कुरण दत्ता के दूरदर्शी नेतृत्व की विशेष सराहना की गई। साथ ही केंद्र के सभी शिक्षकों, समन्वयकों और कर्मचारियों के समर्पण और अनुशासन को इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मजबूत आधारशिला बताया गया। यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदी के माध्यम से भारत–श्रीलंका सांस्कृतिक मैत्री, साहित्यिक संवाद और शैक्षणिक सहयोग का ऐतिहासिक पर्व बनकर उभरा।

