फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में गोपालगंज में ठोस पहल, 10 फरवरी से शुरू होगा सर्वजन दवा सेवन अभियान
गोपालगंज (बिहार): फाइलेरिया जैसी गंभीर और लाइलाज बीमारी के उन्मूलन को लेकर गोपालगंज जिले में प्रशासनिक और स्वास्थ्य स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आगामी 10 फरवरी 2026 से जिलेभर में सर्वजन दवा सेवन अभियान (एमडीए) की शुरुआत की जाएगी, जिसका उद्देश्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक फाइलेरिया रोधी दवा पहुंचाकर संक्रमण की श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ना है। इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सदर अस्पताल स्थित एनआरसी भवन में जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह जिला कोर ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुषमा शरण ने की।
बैठक के दौरान जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम एवं वीबीडीएस को टीओटी (ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स) के तहत अभियान से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए। प्रशिक्षण में दवा वितरण की प्रक्रिया, संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी, जनजागरूकता रणनीति और फील्ड स्तर पर निगरानी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की चूक न हो।
इस अवसर पर जानकारी दी गई कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 20 सदस्यीय जिला कोर ग्रुप का गठन किया गया है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर सीएचओ के नेतृत्व में गठित पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफार्म (PSP) के सक्रिय सदस्यों को इस कोर ग्रुप से जोड़ा गया है। यह समूह समुदाय में विश्वास निर्माण, जागरूकता फैलाने और शत-प्रतिशत दवा सेवन सुनिश्चित कराने में अहम भूमिका निभाएगा।
प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए डॉ. सुषमा शरण ने बताया कि फाइलेरिया क्यूलेक्स प्रजाति की मादा मच्छर के काटने से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जिसका प्रभाव तुरंत सामने नहीं आता। संक्रमण के 5 से 10 वर्षों बाद हाथीपांव या हाइड्रोसील जैसी गंभीर और आजीवन कष्ट देने वाली समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बीमारी से बचाव का एकमात्र प्रभावी उपाय नियमित और पूर्ण दवा सेवन है।
उन्होंने यह भी बताया कि सर्वजन दवा सेवन अभियान के अंतर्गत केवल बीमार ही नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों को भी फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जाती हैं, ताकि शरीर में छिपे संक्रमण को समाप्त कर बीमारी के प्रसार को रोका जा सके। वर्ष 2026 के इस अभियान में जिले के हर पात्र व्यक्ति को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
डॉ. सुषमा शरण ने कहा कि एमडीए केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामुदायिक आंदोलन है। जब पंचायत प्रतिनिधि, मुखिया, वार्ड सदस्य और स्वयं फाइलेरिया से प्रभावित लोग आगे आकर दवा सेवन का संदेश देते हैं, तो समाज में भरोसा बढ़ता है और अभियान को सफलता मिलती है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, पीएसपी सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की।
बैठक में जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार अमित कुमार, वीडीसीओ प्रशांत कुमार, वीडीसीओ राजेश कुमार, सीफार के जिला समन्वयक नेहा कुमारी, पीरामल संस्था के प्रतिनिधि सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करने का संकल्प दोहराया।

