आठो याम...…
/// जगत दर्शन न्यूज
अवध दुलारे राम प्रभु, गोकुल नंदन श्याम।
शिव शंभू कैलाशपति, विनवौ आठो याम।।
त्रिशूल धारी शिव प्रभु, धनुधारी श्री राम।
चक्रधारी श्री कृष्ण को, विनवौं आठो याम।।
सीता की श्री राम प्रभु, रुक्मणी के घनश्याम।
गौरापति कैलाशपति, विनवौ आठो याम।।
रावण मर्दक राम प्रभु, कंश संहारक श्याम।
जलंधर मारक शिव प्रभु, विनवौं आठो याम।।
जगनायक श्री राम प्रभु, जगनायक घनश्याम।
जग रक्षक शिव शंभू को, विनवौं आठो याम।।
सभी सत्य स्वरूप हैं, सभी सत्य शिव नाम।
रक्षक संत समाज के, विनवौं आठो याम।।
शरणागत सत् भाव से, बहु विधि करत गुहार।
मुझ खल कामी दिन को, सहज करो भव पार।।
है बिजेन्द्र की कामना, आशीष बरसे माथ।
सत् पथ पर सत् भाव से, चलूँ सदा हे नाथ।।


