100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत लहलादपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
सारण (बिहार): महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार पटना के तत्वावधान में चल रहे 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत सारण जिले के लहलादपुर प्रखंड में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करना और इसे जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत जिला परियोजना प्रबंधक श्री प्रेम प्रकाश ने बाल विवाह और लैंगिक हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा के साथ की। उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है, इससे पहले विवाह होने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल कानूनन अपराध ही नहीं, बल्कि एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को गहराई से प्रभावित करती है। उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो उसे तुरंत पंचायत या जिला प्रशासन को दें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाल विवाह बालिकाओं के पूरे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे वे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से कभी पूरी तरह उबर नहीं पातीं। साथ ही उन्होंने बाल विवाह और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में सहायता के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर और 181 महिला हेल्पलाइन की विस्तृत जानकारी दी।
डिस्ट्रिक्ट हब फॉर विमेन एंपावरमेंट के फाइनेंशियल लिटरेसी एक्सपर्ट श्री सत्येंद्र कुमार ने बाल विवाह के विरोध को महिला सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कहा कि यह न तो व्यक्तिगत विकास के लिए उचित है और न ही समाज के लिए लाभकारी। उन्होंने प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में सभी के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिकायत और सहायता के लिए 181 महिला हेल्पलाइन, 1098 चाइल्डलाइन और आपात स्थिति में 112 पुलिस सहायता से संपर्क करने की सलाह दी। इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न वित्तीय एवं कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी महिलाओं को दी।
जिला हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीमेन कार्यालय की जेंडर विशेषज्ञ श्रीमती सुजाता श्री ने भी बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा है जो किसी भी विकसित समाज के लिए घातक है। इससे किशोरियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और वे कई प्रकार की बीमारियों की शिकार हो जाती हैं। उन्होंने सभी से मिलकर बाल विवाह रोकने का संकल्प लेने की अपील की।
इस जागरूकता कार्यक्रम में जीविका के पदाधिकारी, जीविका समूह की महिलाएं, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पीएलवी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता फैलाने और अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

