कंपकंपाती ठंड में उम्मीद की गरमाहट: असहायों को शाल–कंबल देकर साहस समिति ने दिखाई इंसानियत
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: जब शीतलहर की सर्द हवाएं शरीर के साथ-साथ आत्मा को भी कंपा रही हैं, ऐसे कठिन समय में इंसानियत की गरमाहट लेकर साहस संयुक्त समिति आगे आई। रविवार को अमनौर प्रखंड अंतर्गत जोगनी परसा बाजार में समिति के तत्वावधान में 250 जरूरतमंद, असहाय और गरीब लोगों के बीच गर्म शाल एवं कंबल का वितरण किया गया। ठंड से ठिठुरते चेहरों पर जब कंबल ओढ़ने के बाद सुकून की मुस्कान आई, तो यह दृश्य मानवीय संवेदना को झकझोर देने वाला था।
कार्यक्रम के दौरान भूतपूर्व प्रधानाध्यापक डॉ. शहजाद आलम ने कहा कि ठंड केवल मौसम की नहीं होती, बल्कि यह समाज की संवेदनहीनता की भी परीक्षा लेती है। ऐसे समय में जरूरतमंदों के साथ खड़ा होना ही सच्ची समाजसेवा है। उन्होंने साहस संयुक्त समिति की इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
साहस संयुक्त समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह उपाध्याय ने कहा कि शीतलहर में सड़क किनारे, बाजारों और झोपड़ियों में जीवन गुजार रहे लोगों के लिए एक कंबल सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा है। समिति का प्रयास है कि कोई भी गरीब ठंड के कारण असहाय महसूस न करे। उपाध्यक्ष अतुल कुमार राय ने भी कहा कि सेवा का असली अर्थ जरूरत के समय काम आना है।
इस मानवीय अभियान में समिति के सदस्य अमित कुमार, राम सिंह, मुन्ना कुमार, राम बाबू जी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सक्रिय रूप से जुटे रहे। वहीं, स्थानीय समाजसेवी और गणमान्य लोगों में रणजीत सिंह, अमीर राय, अजय सिंह, मिंटू जी, केदार राम, त्रिलोकी महतो, जगदीश मांझी, अरविंद पांडे, राकेश कुमार, रणजीत कुमार, सोहैल अख्तर और सोनू कुमार की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और मजबूती दी।
कंबल और शाल पाकर बुजुर्गों, महिलाओं और गरीब मजदूरों की आंखों में राहत और कृतज्ञता साफ झलक रही थी। कई लोगों ने कहा कि इस ठंड में साहस संयुक्त समिति उनके लिए फरिश्ता बनकर आई है। स्थानीय लोगों ने समिति की खुले दिल से सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में भी ऐसे सामाजिक कार्य जारी रहेंगे।
शीतलहर के इस दौर में साहस संयुक्त समिति की यह पहल न सिर्फ जरूरतमंदों के लिए राहत बनी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गई कि अगर संवेदना जिंदा है, तो कोई भी मौसम इंसानियत को जमा नहीं सकता।
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