फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में सीवान में सामुदायिक जागरूकता अभियान तेज, जनभागीदारी पर विशेष जोर
- फाइलेरिया उन्मूलन में समाज की साझी जिम्मेदारी
- पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर स्कूली बच्चों तक निभा रहे हैं अहम भूमिका
- एमडीए से पहले प्री-एमडीए जागरूकता अभियान ने पकड़ी रफ्तार
- स्वास्थ्य विभाग के साथ सहयोगी संस्थाएं भी जुटीं
सिवान (बिहार): फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीवान जिले में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सहयोगी संस्थाएं भी पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। आगामी 10 फरवरी से शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान से पहले जिले में प्री-एमडीए चरण के तहत सामुदायिक जागरूकता को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग दवा सेवन के लिए आगे आएं और भ्रांतियों को दूर किया जा सके।
इसी क्रम में पिरामल संस्था द्वारा पंचायत स्तर से लेकर स्कूल और स्वयं सहायता समूह तक व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान में पंचायत मुखिया, अन्य जनप्रतिनिधि, जीविका स्वयं सहायता समूह, स्कूली छात्र-छात्राएं और सामुदायिक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
स्कूली छात्र-छात्राओं को बनाया जा रहा है जागरूकता का माध्यम
जिले के सभी प्रखंडों में स्कूली छात्र-छात्राओं को फाइलेरिया से बचाव, दवा सेवन की आवश्यकता और इसके लाभ के बारे में जानकारी दी जा रही है। बच्चों को न केवल स्वयं दवा सेवन के लिए प्रेरित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि संदेश घर-घर तक पहुंचे।
जनप्रतिनिधि और जीविका दीदी निभा रहीं अहम भूमिका
पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों और जीविका दीदियों को भी सामुदायिक जागरूकता अभियान से जोड़ा गया है। बैठकें, समूह चर्चाएं और घर-घर संवाद के माध्यम से वे लोगों को फाइलेरिया उन्मूलन, दवा सेवन की अनिवार्यता और इससे होने वाले लाभों के बारे में जानकारी दे रही हैं। इससे समुदाय में भरोसा बढ़ रहा है और दवा सेवन को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है। स्कूली बच्चे, जीविका दीदी और जनप्रतिनिधि समाज में जागरूकता फैलाकर इस अभियान को सफल बना सकते हैं।
पीएसपी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी
हसनपुर प्रखंड में गठित पांच पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (PSP) के सदस्य भी फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को फाइलेरिया से बचाव, नियमित दवा सेवन और रोग से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का कार्य कर रहे हैं। इसके साथ-साथ स्कूलों में भी जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
10 फरवरी से शुरू होगा सर्वजन दवा सेवन अभियान
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओपी लाल ने कहा कि जिले में 10 फरवरी से फाइलेरिया से बचाव के लिए सर्वजन दवा सेवन अभियान की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मी और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लक्षित लाभार्थियों को दवा खिलाएंगे। इसके लिए माइक्रोप्लानिंग का कार्य किया जा रहा है, वहीं आशा कार्यकर्ताओं द्वारा पूर्व सर्वे भी किया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रह जाए। स्वास्थ्य विभाग और सहयोगी संस्थाओं का मानना है कि सामुदायिक जागरूकता और जनभागीदारी के माध्यम से ही फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को समय पर हासिल किया जा सकता है।
दवा खाएं, बीमारी भगाएं
फाइलेरिया एक रोकथाम योग्य बीमारी है, जिसे सही समय पर दवा सेवन से पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान इसी उद्देश्य से हर व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास है। एमडीए के दौरान दी जाने वाली दवा पूरी तरह सुरक्षित है। इसे स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति को भी खाना जरूरी है, क्योंकि बीमारी के कीटाणु शरीर में बिना लक्षण के भी मौजूद हो सकते हैं। साल में एक बार दवा सेवन करने से फाइलेरिया के संक्रमण की कड़ी टूटती है और आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहती है। घर के सभी पात्र सदस्य दवा लें, तभी गांव और पंचायत फाइलेरिया मुक्त बन सकेगी। फाइलेरिया की दवा से बांझपन, कमजोरी या कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होता। हल्का चक्कर या मतली सामान्य है और कुछ समय में ठीक हो जाता है।

