सारण: ‘केले के फल का मूल्य संवर्धन’ पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, 55 युवक-युवतियों ने लिया भाग
सारण (बिहार): कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी, सारण में अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत “केले के फल का मूल्य संवर्धन” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 20 दिसंबर 2025 को केन्द्र के प्रशिक्षण कक्ष में किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के युवक एवं युवतियों में मूल्य संवर्धन के प्रति रुचि विकसित करना तथा स्वरोजगार के नए अवसरों से उन्हें जोड़ना रहा।
समापन समारोह में कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. संजय कुमार राय ने प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को इसे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवहारिक रूप से लागू करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्धन के माध्यम से कृषि उत्पादों की आय बढ़ाई जा सकती है और ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. जितेन्द्र चंदोला ने केले के साथ-साथ आम, अमरूद एवं लीची जैसे फलों के मूल्य संवर्धन की तकनीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. सुषमा टम्टा ने मूल्य संवर्धन की अवधारणा, इसके लाभ तथा विशेष रूप से केले के फल से जुड़े विभिन्न उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रतिभागियों को ग्रीन केला फूड इंटरप्राइजेज, ग्राम कुटुमपुर डुमरी, हाजीपुर का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, जहां उन्हें केले के फल एवं छिलके से चिप्स और पाउडर बनाने की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इस अवसर पर डॉ. जीर विनायक एवं डॉ. विजय कुमार ने भी अपने-अपने विषयों से संबंधित उपयोगी जानकारियाँ साझा कीं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सारण जिले के माँझी एवं गरखा प्रखंड से कुल 55 युवक एवं युवतियों ने भाग लिया। समापन के दौरान प्रतिभागियों एवं केन्द्र के स्टाफ द्वारा परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया तथा स्वच्छता को लेकर शपथ भी ली गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी के अमितेश कुमार गौरव, रामा रंजन, राकेश कुमार, अंकित कुमार मिश्रा, उमाशंकर, अवनीश पांडेय एवं संतोष कुमार का सराहनीय योगदान रहा।

