निर्दलीय जीत के बाद राहुल राज का भाजपा को समर्थन, शिक्षक हितों को लेकर सीएम से की मुलाकात
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एनडीए प्रत्याशी को हराने वाले राहुल राज का भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी हुआ स्वागत, विधान परिषद में बढ़ेगा सियासी प्रभाव
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार विधान परिषद की सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने वाले डॉ. राहुल राज के राजनीतिक कदमों ने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर को पराजित कर विधान पार्षद बने राहुल राज ने चुनाव परिणाम के महज चार दिनों के भीतर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर शिक्षकों की लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद उनका भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचना और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच स्वागत होना इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना रहा है।
शनिवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी का मार्गदर्शन भी रहा। राहुल राज ने शिक्षक समुदाय की वर्षों से लंबित मांगों, सेवा संबंधी समस्याओं, अधिकारों और सुविधाओं से जुड़े विषयों पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने शिक्षकों के जायज मुद्दों के समाधान के लिए सरकार से ठोस पहल करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
एनडीए प्रत्याशी को हराकर बने थे विधान पार्षद:
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को हुई मतगणना में डॉ. राहुल राज ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। उन्होंने एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर को पराजित किया था। राहुल राज पूर्व में भाजपा से जुड़े रहे हैं और पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे। उनकी जीत को एनडीए के चुनावी समीकरणों के लिए बड़ा झटका माना गया था। खासकर भाजपा और जदयू के बीच सीट बंटवारे के बावजूद जदयू प्रत्याशी की हार ने गठबंधन के भीतर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया था।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी हुआ स्वागत:
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राहुल राज भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे। वहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा के बिहार प्रभारी हरीश द्विवेदी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उनका स्वागत किया। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित निर्दलीय विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी भी इस दौरान मौजूद रहे। दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों की भाजपा के साथ राजनीतिक नजदीकी और समर्थन को बिहार की बदलती सियासी परिस्थितियों में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
शिक्षकों की मांगों पर रहेगी असली परीक्षा:
राजनीतिक गतिविधियों के बीच राहुल राज के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों से किए गए वादों को पूरा कराने की है। सातवें वेतनमान की मांग, सेवा संबंधी समस्याओं और अन्य लंबित मुद्दों को लेकर शिक्षक समुदाय उनसे उम्मीद लगाए बैठा है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अब शिक्षकों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। राहुल राज ने भी भरोसा दिलाया है कि शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार सरकार और विधान परिषद के मंच पर उठाया जाएगा।
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मिली जीत के बाद सत्तारूढ़ दल के साथ बढ़ती राजनीतिक नजदीकी ने राहुल राज की नई भूमिका को चर्चा में ला दिया है। हालांकि उनके लिए राजनीतिक समर्थन से अधिक महत्वपूर्ण शिक्षकों के बीच कायम जनादेश और भरोसे को बनाए रखना होगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि उनकी राजनीतिक सक्रियता शिक्षकों की लंबित मांगों के समाधान में कितनी प्रभावी साबित होती है।

