पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने डॉ. नन्दकिशोर साह की पांचवीं पुस्तक हिंदी दुनिया का किया विमोचन
विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में मिला हिंदी गौरव सम्मान, 20 से अधिक देशों के साहित्यकारों और विद्वानों ने लिया हिस्सा
नई दिल्ली/मोतिहारी: विश्व हिंदी परिषद, नई दिल्ली के तत्वावधान में 30 और 31 अक्टूबर 2026 को विज्ञान भवन में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी : हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के बनकटवा निवासी डॉ. नन्दकिशोर साह की पांचवीं पुस्तक हिंदी दुनिया का विमोचन किया। इस अवसर पर हिंदी भाषा, साहित्य और हिंदी सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. साह को प्रतिष्ठित हिंदी गौरव सम्मान से भी सम्मानित किया गया।
सम्मेलन में भारत सहित 20 से अधिक देशों के प्रवासी हिंदी साहित्यकारों, विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और हिंदी प्रचारकों ने भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के हिंदी भाषा के प्रति योगदान, उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा, लोकतांत्रिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक चेतना और सुशासन की अवधारणा को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रेखांकित करना था।
हिंदी की वैश्विक भूमिका पर हुआ मंथन
सम्मेलन के दौरान हिंदी की वैश्विक स्थिति, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रबोध के निर्माण में हिंदी की भूमिका, प्रवासी भारतीयों के बीच हिंदी के प्रचार-प्रसार तथा समकालीन वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में हिंदी साहित्य की प्रासंगिकता पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। दो अकादमिक सत्रों में शोधार्थियों और विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
डॉ. नन्दकिशोर साह को मिला हिंदी गौरव सम्मान
पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन प्रखंड अंतर्गत बनकटवा निवासी डॉ. नन्दकिशोर साह साधारण किसान स्वर्गीय शिवराज साह के पुत्र हैं। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन मुख्यालय, लखनऊ में कार्यरत हैं।
हिंदी भाषा, साहित्य, शिक्षण और शोध में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें हिंदी गौरव सम्मान प्रदान किया गया। फिजी के राजदूत जगन्नाथ सामी, भारत सरकार के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी, विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. विपिन कुमार, वरिष्ठ राजनेता के.सी. त्यागी और रवि शंकर अय्यर सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें प्रतीक चिह्न एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
पांचवीं पुस्तक का हुआ विमोचन
सम्मेलन का विशेष आकर्षण डॉ. नन्दकिशोर साह की पांचवीं पुस्तक हिंदी दुनिया का विमोचन रहा। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने अपने कर-कमलों से पुस्तक का लोकार्पण किया।
इससे पहले डॉ. साह की चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें सफलता का सोपान : इंटरव्यू, यादों के झरोखों से : बापू, समावेशी विकास में शिक्षा और समाज तथा आधुनिक साक्षात्कार और सामूहिक परिचर्चा शामिल हैं। उनकी पुस्तकों का प्रकाशन उपकार प्रकाशन, आगरा, अखंड पब्लिकेशन और अस्तित्व प्रकाशन सहित विभिन्न प्रकाशकों द्वारा किया गया है।
पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
डॉ. नन्दकिशोर साह को इससे पूर्व विश्व हिंदी सेवा सम्मान 2025 और भाषा रत्न सम्मान 2026 सहित 10 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। हिंदी दुनिया के विमोचन और हिंदी गौरव सम्मान मिलने से उनके साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान को एक और महत्वपूर्ण पहचान मिली है।
सम्मेलन में विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मभूषण यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद, वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, अश्विनी कुमार चौबे, संजय पासवान, प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, डॉ. अशोक कुमार भार्गव, प्रो. राजारत्नम, प्रो. अर्जुन चौहान, डॉ. डी.पी. मिश्र, रश्मि सलूजा, अनिल ठाकुर, मनीष कुमार पांडेय, प्रो. मनु प्रताप और डॉ. सुनील कुमार चम्पारणी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
विदेशों से भी कई हिंदी साहित्यकारों और विद्वानों ने सम्मेलन में भाग लिया। इनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, लंदन, कतर, मॉरीशस, बहरीन, इंडोनेशिया, थाईलैंड, नीदरलैंड्स, श्रीलंका और अर्मेनिया से आए प्रतिनिधि शामिल थे।
डॉ. नन्दकिशोर साह की इस उपलब्धि पर पूर्वी चंपारण सहित उनके गृह क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और साहित्यप्रेमियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।

