लकड़ी की प्रतिमा, लेकिन जोड़ का नामोनिशान नहीं, छपरा की काठ वाली देवी की अनोखी मान्यता
करीब 300 साल पुराना मंदिर, नीम की लकड़ी से बनी प्रतिमा की अनूठी कथा:
✍️धर्मेंद्र रस्तोगी
बिहार के छपरा शहर में आस्था और परंपरा से जुड़ा एक ऐसा देवी स्थल है, जिसकी प्रतिमा अपनी अनूठी बनावट के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। कटरा मोहल्ले में स्थित मां काठ वाली देवी की प्रतिमा लकड़ी से निर्मित है, लेकिन इसकी खासियत यह बताई जाती है कि इसमें कहीं भी जोड़ दिखाई नहीं देता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब तीन सौ साल पहले एक विशाल नीम के पेड़ की लकड़ी से इस प्रतिमा का निर्माण कराया गया था। समय के साथ यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया।
पुजारी के सपने से जुड़ी है प्रतिमा निर्माण की कथा:
स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित कथा के अनुसार, करीब तीन सौ वर्ष पहले उस स्थान पर एक विशाल नीम का पेड़ हुआ करता था, जहां आज मां काठ वाली देवी का मंदिर स्थित है। मान्यता है कि एक रात माता ने वहां रहने वाले पुजारी को सपने में दर्शन देकर उसी नीम के पेड़ की लकड़ी से अपनी प्रतिमा बनवाने का निर्देश दिया था। ऐसा कहा जाता है कि इसके बाद पुजारी ने एक बढ़ई को बुलाया और नीम के पेड़ को कटवा कर उसी लकड़ी से देवी की प्रतिमा का निर्माण कराया। इसी घटना को मां काठ वाली देवी की स्थापना से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इस कथा के ऐतिहासिक प्रमाणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह मान्यता पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है।
प्रतिमा की बनावट है आकर्षण का केंद्र:
मां काठ वाली देवी की प्रतिमा की सबसे खास विशेषता उसका लकड़ी से निर्मित होना और उसमें जोड़ दिखाई नहीं देना बताया जाता है। सामान्य तौर पर लकड़ी से तैयार की जाने वाली कलाकृतियों में अलग- अलग हिस्सों को जोड़कर आकार दिया जाता है, लेकिन इस प्रतिमा को लेकर स्थानीय लोगों के बीच यह विशेष मान्यता है कि इसमें जोड़ का नामोनिशान नहीं है। यही विशेषता इसे अन्य देवी प्रतिमाओं से अलग पहचान देती है। प्रतिमा के निर्माण से जुड़ी कथा और उसकी विशिष्ट बनावट श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल पैदा करती है। मां काठ वाली देवी के प्रति लोगों की आस्था केवल धार्मिक विश्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा और स्थानीय विरासत से भी जुड़ी हुई है।
तीन सदियों की परंपरा से जुड़ा है आस्था का केंद्र:
छपरा के कटरा मोहल्ले में स्थित मां काठ वाली देवी का मंदिर स्थानीय धार्मिक परंपराओं की उस विरासत का हिस्सा है, जिसमें पीढ़ियों से चली आ रही कथाएं और विश्वास किसी स्थान की विशिष्ट पहचान बन जाते हैं। करीब तीन सौ साल पुरानी बताई जाने वाली स्थापना की कथा इस मंदिर को विशेष बनाती है। लकड़ी की प्रतिमा, नीम के पेड़ से जुड़ी मान्यता और बिना जोड़ की अनूठी बनावट इस धार्मिक स्थल की पहचान के प्रमुख पहलू हैं। ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थलों का महत्व उनकी पूजा-पद्धति के साथ-साथ उनसे जुड़ी लोककथाओं और सांस्कृतिक स्मृतियों में भी निहित होता है। मां काठ वाली देवी का यह स्थल छपरा की धार्मिक विरासत का ऐसा ही एक उदाहरण है, जहां आस्था के साथ इतिहास और परंपरा की कहानियां भी जीवित हैं।

