कुरुक्षेत्र’ के मंचन ने दिया कर्म और मानवता का संदेश, पुरबिया रंग महोत्सव में सजी दिनकर की कालजयी रचना
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार, जिला प्रशासन और एसोसिएशन फॉर सोशल हारमोनी एंड आर्ट, छपरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय पुरबिया रंग महोत्सव-2026 के दूसरे दिन राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी काव्य रचना ‘कुरुक्षेत्र’ का नाट्य मंचन किया गया। भिखारी ठाकुर सभागार में हुए आयोजन में विधान पार्षद डॉ. वीरेंद्र नारायण यादव सहित प्रशासनिक एवं न्यायिक पदाधिकारी और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
मंचन में महाभारत युद्ध के बाद की परिस्थितियों को केंद्र में रखते हुए युद्ध, मानवता, कर्तव्य और कर्म के बीच के द्वंद्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। युधिष्ठिर के पश्चाताप और भीष्म के उपदेशों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण संदेशों को दर्शकों तक पहुंचाया गया।
युद्ध के बाद युधिष्ठिर के पश्चाताप को किया प्रस्तुत
नाटक के निर्देशक मोहम्मद जहांगीर ने बताया कि रामधारी सिंह दिनकर ने ‘कुरुक्षेत्र’ की रचना वर्ष 1946 में द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका की पृष्ठभूमि में की थी। रचना की कथा महाभारत युद्ध के बाद की परिस्थितियों से जुड़ी है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल महाभारत की कथा को दोहराना नहीं था।
नाटक में यह संदेश उभरकर सामने आया कि युद्ध स्थायी शांति का माध्यम नहीं हो सकता। मनुष्य का धर्म कर्म करते रहना है और भावनाओं को अपने कर्तव्य पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
युद्ध समाप्त होने के बाद युधिष्ठिर के मन में उठ रहे पश्चाताप और सवालों को मंच पर प्रभावी ढंग से रखा गया। भीष्म उन्हें कर्तव्य और कर्म का महत्व समझाते हैं। इस दृष्टि से नाटक के युधिष्ठिर की तुलना गीता के अर्जुन से की गई।
अंतर यह है कि अर्जुन युद्ध से पहले मोह और संशय में थे, जबकि युधिष्ठिर युद्ध के बाद पश्चाताप से गुजरते हैं। दिनकर ने दोनों पात्रों के माध्यम से युद्ध, कर्तव्य और मानव जीवन से जुड़े गंभीर सवालों को सामने रखा है।
भाग्यवाद के बजाय कर्म का संदेश
मंचन में दिनकर की उस विचारधारा को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसमें भाग्यवाद के बजाय कर्म में विश्वास करने की प्रेरणा दी गई है। भारतीय संस्कृति के उदार स्वरूप और मानवता के प्रति जिम्मेदारी को भी नाटक के माध्यम से रेखांकित किया गया।
नाटक का केंद्रीय संदेश रहा कि सच्चा मनुष्य वही है, जो केवल अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी जीता है। कर्म, कर्तव्य और मानवता को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा मंचन के जरिए दर्शकों तक पहुंची।
इन कलाकारों ने किया अभिनय
‘कुरुक्षेत्र’ के मंचन में गोविंद कुमार, सोनू कुमार, विक्की ज्वेल, अभिषेक शर्मा, शिवम कुमार मिश्रा, अनुपम कुमार शाह, विक्की कुमार, हरिनन्दन कुमार, हिमांशू कुमार, शिव कुमार, विक्रम कुमार, सिमरन और महिमा ने अभिनय किया।
वाद्य यंत्र पर उत्पल कुमार, हारमोनियम पर आसिफ अली और स्वर पर व्रजराज ने सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन संजय पांडे ने किया।
मेकअप की जिम्मेदारी जितेंद्र जीतू और प्रकाश ने संभाली। नाटक की परिकल्पना विनय कुमार की रही, जबकि वस्त्र विन्यास महिमा और सुल्तान परवीन ने किया। मंच प्रबंधन शाहबाज अली और मोहम्मद जहांगीर ने संभाला तथा पूर्वाभ्यास प्रभारी आकाश केसरी रहे।
पुरबिया रंग महोत्सव के दूसरे दिन हुए इस मंचन ने दर्शकों को दिनकर की रचना के साहित्यिक, दार्शनिक और मानवीय पक्ष से रूबरू कराया। कलाकारों के अभिनय और मंच प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा।
‘कुरुक्षेत्र’ के मंचन ने दिया कर्म और मानवता का संदेश, पुरबिया रंग महोत्सव में सजी दिनकर की रचना
छपरा के पुरबिया रंग महोत्सव-2026 में रामधारी सिंह दिनकर की ‘कुरुक्षेत्र’ का मंचन हुआ। युधिष्ठिर के पश्चाताप और भीष्म के उपदेशों के जरिए कर्म, कर्तव्य और मानवता का संदेश दिया गया।
पुरबिया रंग महोत्सव में कुरुक्षेत्र का मंचन

