महापुरुष : साहित्य और समाज
गोस्वामी तुलसीदास का जीवन-संदेश
✍️राजीव कुमार झा
आज हिंदी साहित्य के महान कवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती है। उन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से समस्त संसार को सदाचार का संदेश दिया। इसके साथ ही, अपने काव्य-सृजन से मानवता को संकट के काल में आशा और विश्वास की ओर उन्मुख किया। तुलसीदास मध्यकाल के महान कवि थे। उनके समय में देश में इस्लामी शासन था और समाज में धर्म के नाम पर अत्याचार एवं उत्पीड़न का दमनचक्र चल रहा था। विद्वानों का मत है कि ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में तुलसीदास ने रामकथा को आधार बनाकर समाज के लोगों को मानव-धर्म के पालन की ओर उन्मुख किया।
तुलसीदास के काव्य का मूल स्वर जीवन की समस्त विषमताओं के बीच सामंजस्य और समन्वय की भावना को समाज में स्थापित करना है। इस दृष्टि से तुलसीदास को केवल कवि कहना उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को सीमित करना होगा। वे समाज के पथ-प्रदर्शक और पतनोन्मुख मानवता के उद्धारक के रूप में भी स्मरण किए जाते हैं। प्रसिद्ध विद्वान जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने इसी कारण उन्हें महात्मा बुद्ध के बाद भारत का दूसरा लोकनायक कहा था।
‘रामचरितमानस’ तुलसीदास द्वारा रचित महान काव्यग्रंथ है, जिसे विश्व साहित्य के अत्यंत सम्मानित ग्रंथों में स्थान प्राप्त है। इस ग्रंथ में तुलसीदास ने रामकथा के माध्यम से मानव-धर्म का व्यापक प्रतिपादन किया है। आलोचकों का मानना है कि ‘रामचरितमानस’ का समुचित अनुशीलन, जिसे हिंदू धर्मावलंबी नवाह्न पारायण कहते हैं, आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
वास्तव में ‘रामचरितमानस’ की चौपाइयां, दोहे और सोरठे अत्यंत सरस, सरल एवं ज्ञानवर्धक हैं। इनके पठन और श्रवण से मनुष्य के भीतर सद्भाव, भक्ति और नैतिक चेतना का विकास होता है। तुलसीदास ने इस ग्रंथ में ज्ञान, बुद्धि, विवेक और नीति का समुचित समावेश करते हुए रामकथा को एक नया रचनात्मक आयाम प्रदान किया। उनके साहित्य में केवल धार्मिक भावना ही नहीं, बल्कि मानव जीवन के नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का भी व्यापक चित्रण मिलता है।
तुलसीदास ने अपने काव्य के माध्यम से समस्त संसार के सुख, शांति और कल्याण की कामना की। यही कारण है कि आलोचक उन्हें ‘लोक-मंगल का कवि’ मानते हैं। ‘रामचरितमानस’ की कथा अत्यंत पावन और जीवनोपयोगी है। आज भी इसका पाठ, वाचन और श्रवण देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा और आस्था के साथ किया जाता है। तुलसीदास का साहित्य हमें यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को सत्य, सदाचार, करुणा, मर्यादा और मानवता का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। यही उनके जीवन और साहित्य का शाश्वत संदेश है।

