डायरिया से डरने नहीं सतर्क रहने की जरूरत : ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल
• डायरिया नियंत्रण व रोकथाम के लिए विशेष अभियान का शुभारम्भ
• एम्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने प्रचार वाहन को दिखाई हरी झंडी
• जागरूकता अभियान में सहयोग कर रहीं पीएसआई इंडिया व केनव्यू
संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी
पटना (बिहार) | 18 अगस्त 2026
शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को डायरिया से पूरी तरह सुरक्षित बनाने और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से प्रदेश में डायरिया रोकने हेतु जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है । इसी के तहत मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना से एम्स के अधिशाषी निदेशक (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) प्रोफेसर ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल ने मिड मीडिया कैम्पेन का विधिवत शुभारम्भ किया। जागरूकता अभियान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू संपोषित “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रहीं हैं।
इस मौके पर ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल, पीएसआई इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश कुमार शर्मा, डायरेक्टर प्रोग्राम्स हितेश साहनी व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने डायरिया से बचाव, कारण, उपचार और रोकथाम सम्बन्धी संदेशों वाले पोस्टर-बैनर और ऑडियो/वीडियो से सुसज्जित प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रचार वाहन राजधानी पटना के विभिन्न क्षेत्रों में समुदाय में डायरिया के प्रति जन जागरूकता लाएंगे। इस मौके पर ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि डायरिया से डरने नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इसका उपचार पूरी तरह संभव है। बच्चे को दिन में दो-तीन बार पतली दस्त हो तो ओआरएस का घोल और जिंक जरूर दें, क्योंकि यही इसका सही उपचार है।
पीएसआई इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश कुमार शर्मा ने कहा कि बारिश और उमस में बच्चा डायरिया की चपेट में कई कारणों से आ सकता है, जैसे- दूषित जल पीने से, दूषित हाथों से भोजन बनाने या बच्चे को खाना खिलाने, बच्चों के मल का ठीक से निस्तारण न करने आदि से। इसलिए शौच और बच्चों का मल साफ़ करने के बाद, भोजन बनाने और खिलाने से पहले हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह अवश्य धुलें।
पीएसआई इंडिया के डायरेक्टर प्रोग्राम्स हितेश साहनी ने कहा कि डायरिया के प्रति समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और ओआरएस व जिंक की महत्ता को भलीभांति समझाने के लिए ही पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य बच्चों में डायरिया की रोकथाम, ओआरएस व जिंक के उपयोग को प्रोत्साहन और जनसामान्य में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है। फ्रंटलाइन वर्कर्स माताओं और परिवार वालों को यह भली भांति बताएं कि ओआरएस का घोल और जिंक बच्चे को सिर्फ डायरिया से ही नहीं बचाता बल्कि उनकी जान को भी जोखिम में जाने से बचाता है।
“डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के बारे में केनव्यू इंडिया के बिजनेस यूनिट हेड-सेल्फ केयर प्रशांत शिंदे का कहना है कि बच्चों को डायरिया से सुरक्षित बनाकर उन्हें सेहतमंद बनाने की हरसंभव कोशिश जारी है। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बताये अनुसार ओआरएस सॉल्यूशन की पहुँच को बेहतर बनाना, परिवारों को इस बारे में जागरूक बनाना, फ्रंटलाइन वर्कर्स के अभिमुखीकरण और सेहत को लेकर जरूरी व्यवहार परिवर्तन को अपनाना जरूरी है। 'डायरिया से डर नहीं' पहल के जरिए, केनव्यू पीएसआई इंडिया के साथ मिलकर सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में अहम योगदान दे रहा है। इससे बच्चों की देखभाल करने वाले न सिर्फ़ ओआरएस और जिंक की अहमियत को समझ रहे हैं, बल्कि डायरिया होने पर तुरंत इसे अपनाने के लिए भी तैयार हो रहे हैं। हम बच्चों की रोकी जा सकने वाली बीमारियों और मौतों को कम करने की सरकार की कोशिशों में अपना सहयोग जारी रखने का वादा करते हैं। इसके लिए जागरूकता को प्राथमिकता देने के साथ ही कम्युनिटी हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाएँगे और जहाँ सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, वहाँ जीवन बचाने वाले उपायों तक पहुँच बेहतर बनाएंगे।
इस मौके पर बिहार पीएसआई इंडिया राज्य प्रतिनिधि सौरव तिवारी, सीनियर मैनेजर प्रोग्राम अनिल द्विवेदी एवं पीएसआई इंडिया टीम से लोग उपस्थित रहे।

