नन्ही जिंदगी की बड़ी जीत! मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से सारण के 185 बच्चों को मिला नया जीवन
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: सारण जिले में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चलाए जा रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान और नि:शुल्क उपचार का अभियान लगातार जारी है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच जिले में 2,548 आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो लाख 31 हजार से अधिक बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। स्क्रीनिंग के बाद 4,178 बच्चों को जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी), छपरा रेफर किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच के दौरान 221 बच्चों में विभिन्न बीमारियों की पहचान हुई, जबकि 120 बच्चों की नि:शुल्क सफल सर्जरी कराई जा चुकी है। वहीं मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच 34 बच्चों की हृदय सर्जरी हुई है। वर्ष 2021 से जुलाई 2026 तक सारण जिले के 185 बच्चों के दिल में छेद का सफल सर्जिकल उपचार कराया जा चुका है।
आंगनबाड़ी और स्कूलों तक पहुंच रही स्वास्थ्य टीम
डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि आरबीएसके के तहत जिले में 30 मोबाइल स्वास्थ्य टीमें काम कर रही हैं। ये टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों, सरकारी स्कूलों और निर्धारित डिलीवरी प्वाइंट पर पहुंचकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं। किसी बच्चे में बीमारी या जन्मजात समस्या की आशंका मिलने पर उसे आगे की जांच और उपचार के लिए डीईआईसी भेजा जाता है।
आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. जितेंद्र प्रसाद के अनुसार कार्यक्रम के तहत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें मुख्य रूप से 4-डी यानी जन्मजात दोष, बीमारियां, पोषण संबंधी कमियां और विकास में देरी पर ध्यान दिया जाता है।
दिल में छेद से लेकर जन्मजात विकृतियों तक इलाज
कार्यक्रम के तहत करीब 45 प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और उपचार की व्यवस्था है। इनमें जन्मजात हृदय रोग, कटे-फटे होंठ एवं तालू, पैर की विकृतियां, कुपोषण, एनीमिया तथा शारीरिक और मानसिक विकास में देरी जैसी समस्याएं शामिल हैं।
मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत जरूरतमंद बच्चों को हृदय रोग का उपचार और सर्जरी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। गंभीर मामलों में बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने में भी सरकारी स्तर पर सहयोग दिया जाता है।
जांच से मिली बीमारी, सरकारी योजना से हुआ मुफ्त इलाज
रिविलगंज प्रखंड के एक लाभार्थी परिवार ने बताया कि उनके बच्चे को सामान्य कमजोरी समझा जा रहा था। आरबीएसके टीम की जांच के बाद दिल में छेद की जानकारी मिली। इसके बाद सरकारी योजना के माध्यम से बच्चे को अहमदाबाद में बिना किसी खर्च के सर्जरी की सुविधा मिली। परिवार के अनुसार आने-जाने, रहने और खाने की व्यवस्था में भी सहयोग मिला।
दिघवारा की पूजा देवी ने भी बताया कि जांच के दौरान बच्चे की बीमारी का पता चला। शुरुआत में इलाज के खर्च को लेकर परिवार चिंतित था, लेकिन सरकारी व्यवस्था के माध्यम से जांच से लेकर उपचार तक सहायता मिली।
समय पर बीमारी की पहचान सबसे जरूरी
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि आरबीएसके का मुख्य उद्देश्य बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित उपचार से जोड़ना है। कई बीमारियों के शुरुआती लक्षण सामान्य दिखाई देते हैं, ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल स्वास्थ्य टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित रूप से पहुंच रही हैं। गंभीर मामलों को डीईआईसी और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों से जोड़कर बच्चों को नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
एक स्वास्थ्य जांच कई बार बच्चे की पूरी जिंदगी बदल सकती है। सारण में आरबीएसके और मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के जरिए बच्चों को समय पर इलाज मिलने से उनके परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।

