बिहार के 266 एपीएचसी बनेंगे लेवल-1 डिलीवरी पॉइंट, शुरू हुआ गैप असेसमेंट
पटना, 27 जुलाई 2026: बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। राज्य के चयनित 266 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (एपीएचसी) को लेवल-1 डिलीवरी पॉइंट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए सभी चयनित स्वास्थ्य केंद्रों का गैप असेसमेंट शुरू कर दिया गया है, ताकि उपलब्ध संसाधनों और आवश्यक सुविधाओं की कमियों का आकलन कर उन्हें दूर करने की प्रभावी योजना तैयार की जा सके।
राज्य में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए पहले से 1016 डिलीवरी पॉइंट संचालित हैं, जिनमें 434 लेवल-1 डिलीवरी पॉइंट शामिल हैं। अब 266 अतिरिक्त एपीएचसी को लेवल-1 डिलीवरी पॉइंट के रूप में विकसित किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव सेवाओं का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।
ग्रामीण महिलाओं को नजदीक में मिलेगी प्रसव की सुविधा
एम्स पटना की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. इंदिरा प्रसाद ने इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में कई महिलाओं को सामान्य प्रसव के लिए भी सदर अस्पताल या बड़े स्वास्थ्य केंद्रों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में यदि चयनित एपीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टर, एसबीए प्रशिक्षित एएनएम और आवश्यक पैथोलॉजिकल जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, तो महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
सुरक्षित प्रसव से लेकर प्रसवोत्तर देखभाल तक पर जोर
266 अतिरिक्त एपीएचसी के सुदृढ़ीकरण का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उनके नजदीकी क्षेत्र में ही सुरक्षित प्रसव, प्रसवपूर्व जांच और प्रसवोत्तर देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक उपचार मिल सकेगा तथा गंभीर परिस्थितियों में समय रहते उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों तक रेफर करने की व्यवस्था भी मजबूत होगी।
सिविल सर्जन स्तर पर हो रहा भौतिक सत्यापन
राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश के अनुसार प्रत्येक चयनित एपीएचसी का सिविल सर्जन स्तर से हस्ताक्षरित भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। गैप असेसमेंट के दौरान प्रसव कक्ष के लिए उपलब्ध स्थान, एमबीबीएस एवं आयुष चिकित्सा अधिकारियों की उपलब्धता, प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर वार्ड के लिए जगह, एएनएम की कुल संख्या, एसबीए प्रशिक्षित एएनएम की उपलब्धता तथा लैब तकनीशियनों की स्थिति समेत अन्य जरूरी संसाधनों की जानकारी जुटाई जा रही है।
इस आकलन के आधार पर प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद कमियों को चिह्नित कर आवश्यक मानव संसाधन, आधारभूत संरचना और जांच सुविधाओं को विकसित करने की योजना तैयार की जाएगी। 266 नए लेवल-1 डिलीवरी पॉइंट के विकसित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलने के साथ महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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