आपातकाल लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय, ‘संपूर्ण क्रांति’ आज भी प्रासंगिक : रामायण जीवनदानी
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल को सबसे काला अध्याय मानते हुए लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा को आज भी प्रासंगिक बताया गया। आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर जेपी की जन्मस्थली सिताब दियारा स्थित जयप्रकाश नारायण स्मृति ट्रस्ट के प्रांगण में आयोजित विशेष बैठक में लोकतंत्र की रक्षा, युवाओं में जेपी के विचारों के प्रसार तथा सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर की गई। इस दौरान उपस्थित पदाधिकारियों और समाजसेवियों ने जेपी के संघर्षमय जीवन तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके योगदान को याद किया।
बैठक को संबोधित करते हुए ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी रामायण जीवनदानी ने कहा कि वर्ष 1947 में देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना हुई, लेकिन 25 जून 1975 की मध्यरात्रि को लागू किए गए आपातकाल ने नागरिकों के मौलिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर आघात पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उस दौर में लाखों लोगों को जेलों में बंद किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित कई संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिए गए थे। उन्होंने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि इस दौर को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
रामायण जीवनदानी ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने तानाशाही प्रवृत्तियों के सामने कभी समझौता नहीं किया और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि जेपी द्वारा प्रतिपादित ‘संपूर्ण क्रांति’ केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि समाज में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन की सतत प्रक्रिया है। वर्तमान समय में भी उनके विचार लोकतांत्रिक मूल्यों, जनभागीदारी और सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि 25 जून का दिन लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेपी के साहस, त्याग और संघर्ष को स्मरण करने का अवसर है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ट्रस्ट आगामी दिनों में सारण प्रमंडल सहित बिहार के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में “जेपी के विचार और आज का युवा” विषय पर संगोष्ठी, निबंध लेखन तथा वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन करेगा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों से जोड़ना तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक बनाना है। साथ ही गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता कार्यक्रमों का विस्तार करने तथा नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन को और गति देने का भी निर्णय लिया गया। ट्रस्ट ने यह भी तय किया कि जेपी के ऐतिहासिक भाषणों, लेखों और विचारों को डिजिटल माध्यमों के जरिए युवाओं तक पहुंचाया जाएगा, ताकि वे उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
बैठक के समापन पर उपस्थित पदाधिकारियों, सदस्यों, शिक्षाविदों एवं बुद्धिजीवियों ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध पंक्तियां “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” दोहराते हुए लोकतंत्र की रक्षा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा ‘संपूर्ण क्रांति’ के मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी रामायण जीवनदानी, आशुतोष कुमार भारती, सचिव आलोक कुमार सिंह, हरेराम सिंह, इंजीनियर जमाल हैदर, दीन दयाल, भगवान गिरी सहित कई प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद एवं जेपी आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ समाजसेवी उपस्थित रहे।

