प्रेरणा वृद्धाश्रम में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भव्य कार्यक्रम, 21 महिलाओं को मिला सम्मान
प्रेरणा बुडाकोटी / नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित प्रेरणा वृद्धाश्रम में स्त्री शक्ति संगठन एवं अखिल भारतीय प्रेरणा साहित्य एवं शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 21 महिलाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती रीतू अग्रवाल (धर्मपत्नी श्री पंकज अग्रवाल, IAS) उपस्थित रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ममता सचदेवा (धर्मपत्नी प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलपति, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक) ने की। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि श्रीमती सुमन (सामाजिक अध्ययन अध्यापिका, राजकीय माध्यमिक विद्यालय, ऐबला जागीर, करनाल) रहीं।
इस अवसर पर डॉ. अंजना गर्ग, पूर्व प्रोफेसर एवं निदेशक महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक ने मुख्य वक्ता के रूप में महिला और टेक्नोलॉजी विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक युग में महिलाओं की भागीदारी तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं—सुमन सांगवान, संगीता सिंह, सुनीता श्रीवास्तव, अलका गुप्ता, डिंपल, बबीता गर्ग नरवाना, प्रीति जायसवाल, जयश्री सोनी, राजकुमारी पवार, गीता गुप्ता, उषा गुप्ता, डॉ. पविता चौधरी, कमाली पपोसा, मेघा चौधरी, बिमल कौर पाहवा, सीता देवी, प्रज्ञा, रमीता जिंदल, सीमा चतुर्वेदी, श्वेता मनोचा, नीलम बंसल, वंदना राजोरिया, कीर्ति चुग और डॉ. दर्शना जलंधरा को महिला सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के आयोजन में ममता शर्मा (प्रधान, स्त्री शक्ति संगठन), आशा सिंगला (कोषाध्यक्ष, प्रेरणा), कांता बंसल (संरक्षिका, स्त्री शक्ति संगठन एवं प्रज्ञा साहित्यिक मंच), किरण गर्ग (उपाध्यक्ष, प्रेरणा) और सुरेखा (कार्यक्रम संयोजिका) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया। कुमारी अन्नपूर्णा ने अपने मनमोहक हरियाणवी नृत्य से सभी का मन मोह लिया, जबकि कुमारी रज्जी की कविता ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और सुरक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

