सारण: प्रकृति का अनोखा करिश्मा, सालभर फल देने वाला लौकी का दुर्लभ पेड़ बना आकर्षण
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: सारण जिले के माँझी प्रखंड अंतर्गत गोबरही गांव में लौकी का एक ऐसा अनोखा और दुर्लभ पेड़ देखने को मिल रहा है, जिसने आसपास के लोगों को हैरान कर दिया है। आमतौर पर लौकी की खेती बेल या क्रीपर के रूप में की जाती है, लेकिन गोबरही गांव निवासी उमेश यादव के दरवाजे पर लगा लौकी का यह पेड़ पूरी तरह से अलग पहचान रखता है। करीब 20 फीट ऊंचा यह पेड़ सालभर गोल-मटोल और सुंदर लौकी का फल देता है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।
उमेश यादव ने बताया कि उन्होंने इस लौकी के पेड़ का पौधा करीब दस वर्ष पहले हाजीपुर से लाकर अपने घर के पास लगाया था। पौधा लगाने के लगभग दो वर्ष बाद ही इसमें फूल आना शुरू हो गया और उसके बाद लगातार फल देने लगा। खास बात यह है कि यह पेड़ किसी विशेष देखभाल के बिना भी पूरे वर्ष फल देता रहता है, जो इसे और भी दुर्लभ बनाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस लौकी का स्वाद भी काफी अच्छा होता है। विशेष रूप से इसकी मसालेदार सब्जी लोगों को बेहद पसंद आती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लौकी को लाभकारी माना जाता है, ऐसे में इस पेड़ से मिलने वाली ताजी लौकी ग्रामीणों के लिए सेहत और स्वाद दोनों का माध्यम बनी हुई है।
प्राकृतिक रूप से यह लौकी का पेड़ काफी दुर्लभ बताया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के पेड़ बहुत कम देखने को मिलते हैं, क्योंकि लौकी सामान्यतः बेल के रूप में ही फल देती है। गोबरही गांव में यह अनोखा पेड़ अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है और लोग इसे प्रकृति का अद्भुत उपहार मान रहे हैं।

