सारण: मध्य विद्यालय धनौरा में बच्चों ने प्रस्तुत की छठ महापर्व की मनमोहक झांकी
डूबते और उगते सूर्य को दिया अर्घ्य, पारंपरिक वेशभूषा और छठ गीतों से छठ घाट जैसा बना विद्यालय परिसर
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार के लोक आस्था के महापर्व छठ की महत्ता और परंपराओं से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से राजकीय मध्य विद्यालय धनौरा में छात्र-छात्राओं ने छठ महापर्व की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की। विद्यालय परिसर में प्रधानाध्यापक की देखरेख में कृत्रिम छठ घाट बनाया गया, जहां छात्राओं ने छठव्रती के रूप में पारंपरिक विधि-विधान से डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर छठ गीतों और संगीत के बीच पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। करीब दस छात्राओं ने बांस के कलसूप में नारियल, सेव सहित विभिन्न फल-फूल लेकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया। वहीं, अन्य छात्र-छात्राओं ने सहयोगी की भूमिका निभाई। विद्यालय परिसर में आयोजित इस झांकी को देखने के लिए शिक्षक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने बच्चों का बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीण श्याम किशोर सिंह और जितेंद्र मिश्रा की ओर से शिक्षकों एवं बच्चों के लिए मिठाई की व्यवस्था की गई। वहीं, अभिभावक धीरज सिंह ने कार्यक्रम में शामिल बच्चों को इंस्ट्रूमेंट बॉक्स देकर उनका उत्साह बढ़ाया।
शिक्षिका शिवा चौहान, श्रुति और कुमारी रिंकु ने बच्चों को कार्यक्रम के लिए तैयार किया। वहीं, शिक्षक राकेश कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार मांझी, धर्मेंद्र सिंह और सौरभ कुमार ने आयोजन को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया। शिक्षक देवेश उपाध्याय ने मंत्रोच्चारण के साथ छठ पूजा की परंपराओं को निभाने में अपनी भूमिका निभाई।
इन बच्चों ने निभाई प्रमुख भूमिका
कार्यक्रम में हर्षिता, राधा, नैना, प्रिया, चंचल, ज्योति, वर्षा, जूली, अंशु, रिया, रागिनी, पिंकी, अनुसार, जुही, रानी, रूपा, रूपेश और आर्यण सहित अन्य बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विद्यालय में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने छठ महापर्व की परंपरा, लोक आस्था और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया। ग्रामीणों ने बच्चों की प्रस्तुति की सराहना की।

