सारण में नौ मोर्चों पर परखी गई स्वास्थ्य विभाग की तैयारी, NCDC की टीम ने मेडिकल कॉलेज से PHC तक किया निरीक्षण
रोगों की पहचान, जांच और रिपोर्टिंग से लेकर संक्रमण नियंत्रण तक की हुई पड़ताल, स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया तकनीकी मार्गदर्शन
सारण (बिहार): संक्रामक बीमारियों की समय पर पहचान और उनके प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों की तैयारियों का आकलन करने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), पटना की टीम ने सारण जिले का दौरा किया। 28 से 30 अक्टूबर तक चले इस क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज, सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े नौ प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। टीम ने रोग निगरानी, प्रयोगशाला सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण, अभिलेखों के रखरखाव और समय पर रिपोर्टिंग की व्यवस्था का जायजा लिया। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों को कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, पटना के सहायक निदेशक (माइक्रोबायोलॉजी) डॉ. सुभाष कुमार मिश्रा गोल्डन ने स्टेट पब्लिक हेल्थ ऑब्जर्वर टीम (SPOT) के तहत जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का क्षेत्रीय भ्रमण किया। इस दौरान राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, छपरा; जिला अस्पताल, छपरा; अनुमंडलीय अस्पताल, सोनपुर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दरियापुर का निरीक्षण किया गया।
नौ राष्ट्रीय कार्यक्रमों की बिंदुवार समीक्षा
निरीक्षण के दौरान एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP), टीका-निवारणीय रोगों की निगरानी, राष्ट्रीय एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जूनोसिस नियंत्रण, राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम, लेप्टोस्पायरोसिस नियंत्रण, सर्पदंश प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम, रोगाणुरोधी प्रतिरोध तथा आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
टीम ने यह आकलन किया कि संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में बीमारियों की पहचान, निगरानी और सूचना प्रेषण की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। विशेष रूप से संक्रामक और मौसमी बीमारियों के मामलों की पहचान, उनकी सूचना समय पर जिला स्तर तक पहुंचाने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की व्यवस्था पर ध्यान दिया गया।
रोग निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
भ्रमण के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में रोग निगरानी से जुड़े रिकॉर्ड, रिपोर्टिंग व्यवस्था और अभिलेखों के रखरखाव का आकलन किया गया। प्रयोगशाला सेवाओं की उपलब्धता और कार्यप्रणाली के साथ संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्थाओं की भी पड़ताल की गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी संभावित बीमारी या संक्रमण का मामला सामने आने पर उसकी पहचान और सूचना देने में अनावश्यक देरी न हो।
डॉ. मिश्रा ने स्वास्थ्य पदाधिकारियों और कर्मियों के साथ चर्चा करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण पर जोर दिया। उन्होंने संस्थान स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार अभिलेखों का संधारण करने और समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।
संक्रामक रोगों से लेकर आपदा प्रबंधन तक की तैयारी की पड़ताल
समीक्षा में शामिल कार्यक्रमों का दायरा सामान्य संक्रामक बीमारियों से आगे तक फैला है। इसमें पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों यानी जूनोसिस, रेबीज, लेप्टोस्पायरोसिस और सर्पदंश जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों के साथ जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न स्वास्थ्य जोखिम, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी भी शामिल है।
इन कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी से संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान करने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलती है। विशेष रूप से किसी रोग के प्रकोप की स्थिति में समय पर सूचना, जांच और समुचित कार्रवाई जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, छपरा के प्राचार्य सह अधीक्षक डॉ. प्रो. सी.पी. जायसवाल ने क्षेत्रीय निरीक्षण को संस्थान और जिला स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के निरीक्षण से स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीकी सहयोग मिलता है और रोग निगरानी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।
क्षेत्रीय भ्रमण का व्यापक उद्देश्य जिला एवं संस्थान स्तर पर रोगों की शीघ्र पहचान, प्रभावी निगरानी, समयबद्ध रिपोर्टिंग और राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन को प्रोत्साहित करना है। इससे सारण जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को संक्रामक रोगों और अन्य जनस्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

