अर्णव के कारण आंधी-बारिश से मांझी में धान की फसल बर्बाद, किसानों पर दोहरी मार, सरकार से की क्षति के आकलन और मुआवजे की मांग
गोबरही पंचायत के पूर्व मुखिया देवेंद्र सिंह ने सरकार से की क्षति के आकलन और मुआवजे की मांग, 12 नवंबर को मांझी पहुंचेंगे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: बिहार में चक्रवाती तूफान 'अर्णब' के कारण आंधी और तेज बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सारण जिले के मांझी प्रखंड में तेज हवा और बारिश के कारण धान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। वहीं, सरसों की खेती भी पिछड़ रही है। खेतों की तैयारी के लिए ट्रैक्टर संचालकों की ओर से मनमाना किराया वसूले जाने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
गोबरही पंचायत के पूर्व मुखिया देवेंद्र सिंह ने दूरभाष पर पत्रकारों को बताया कि आंधी और बारिश से प्रभावित किसानों की फसलों का सरकार को सर्वेक्षण कराना चाहिए। उन्होंने बिहार सरकार से नुकसान का आकलन कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
मुख्यमंत्री से किसानों की समस्या देखने की अपील
देवेंद्र सिंह ने 12 नवंबर को मांझी आने वाले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी किसानों की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मांझी के रामघाट स्थित अटल घाट के उद्घाटन के लिए पहुंच रहे हैं। इस दौरान उन्हें क्षेत्र में धान की खड़ी फसल का निरीक्षण भी कराना चाहिए, ताकि बारिश और तेज हवा से हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
उन्होंने सरकार से कृषि विभाग के माध्यम से खेतों का सर्वेक्षण कराने और नुकसान के आधार पर किसानों को मुआवजा देने की मांग की।
सरसों की खेती पिछड़ने से बढ़ी चिंता
क्षेत्र के किसानों की परेशानी केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है। मौसम की मार के बीच सरसों की खेती भी प्रभावित हो रही है। खेतों की तैयारी में देरी और ट्रैक्टर से जुताई के लिए अधिक किराया चुकाने की मजबूरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
किसानों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के मांझी दौरे के दौरान उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा और फसल नुकसान की भरपाई के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से नुकसान के आकलन और मुआवजे को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

